चुनाव आयोग का निर्णय
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और इस्तीफे की मांगों के बीच, चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) आयोजित करने का निर्देश जारी किया है। इस पुनरीक्षण के लिए आधार तिथि 1 जनवरी 2027 निर्धारित की गई है। वर्तमान में कुछ राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य भी जारी है, जिससे यह प्रश्न उठता है कि SSR की आवश्यकता क्यों पड़ी।
SSR एक प्रक्रिया है जो मौजूदा वोटर लिस्ट पर आधारित होती है। इसमें संशोधन से पूर्व की जांच शामिल होती है, जैसे बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन करना, पात्र मतदाताओं की पहचान करना, और गलतियाँ सुधारना। साथ ही, जिन मतदाताओं का नाम दो स्थानों पर है या जो अब मृत हैं, उनकी पहचान भी की जाती है।
मतदाता सूची का अद्यतन कार्यक्रम
चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) को एक ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित करनी होगी। इसके बाद दावों और आपत्तियों के लिए समय दिया जाएगा, जिनका निपटारा अंतिम सूची के प्रकाशन से पूर्व किया जाएगा। मतदाता अपने नाम को जोड़ने के लिए फॉर्म 6, प्रवासी मतदाता के लिए फॉर्म 6A, नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म 7, और पते में बदलाव के लिए फॉर्म 8 का उपयोग कर सकते हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज की जा सकेंगी। 28 दिसंबर तक इनका निपटारा किया जाएगा, और 4 जनवरी 2027 को अंतिम सूची जारी की जाएगी। इस प्रक्रिया में ऐसे लोगों से भी आवेदन मांगे जा रहे हैं, जो 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को मतदाता बनने के योग्य होंगे।
SSR और SIR के बीच अंतर
SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) में मौजूदा सूची में सुधार के बजाय मतदाता सूची को बिल्कुल नए सिरे से तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में मौजूदा मतदाताओं को फॉर्म प्रदान किए जाते हैं और BLOs द्वारा सत्यापन किया जाता है। जमा किए गए फॉर्मों के आधार पर ड्राफ्ट मतदाता सूची बनाई जाती है, और फिर दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जाता है।
SSR की प्रक्रिया में पिछली अंतिम मतदाता सूची का उपयोग किया जाता है, जबकि SIR में 2002-04 की मतदाता सूची को आधार माना जाता है। इसका तात्पर्य है कि SSR के तहत मौजूदा जानकारी को सीधे अगली सूची में शामिल नहीं किया जाता, और मतदाताओं को सत्यापन की प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है।





