फॉर्म 6 के बारे में आयोग का स्पष्टीकरण
चुनाव आयोग ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि जो मतदाता ड्राफ्ट स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) रोल से गायब हैं, वे फॉर्म 6 जमा कर के मतदाता के रूप में शामिल हो सकते हैं। यह स्पष्टीकरण उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके नाम ड्राफ्ट SIR रोल से हटा दिए गए हैं, और जो इस चिंता में हैं कि फॉर्म 6 जमा करना, जिसमें यह घोषणा होती है कि आवेदक पहली बार मतदाता सूची में शामिल होना चाहता है, उन्हें कानूनी दिक्कतों में डाल सकता है।
आयोग ने बताया कि कुछ मतदाता फॉर्म 6 जमा करने में हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि उन्हें यह बताना होता है कि वे पहली बार सूची में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं। आयोग ने कहा, “इसलिए, ऐसे मतदान करने वालों का मानना है कि उनके पिछले एनरोलमेंट को ध्यान में रखते हुए फॉर्म 6 जमा करना गलत डिक्लेरेशन होगा और उन पर रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है।”
गलत डिक्लेरेशन की संभावना से इंकार
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट SIR रोल में नहीं हैं, वे नए सिरे से शामिल होने के लिए फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं, भले ही वे पहले से रजिस्टर्ड हों। आयोग ने बताया कि जिन मामलों में नाम हटा दिए गए हैं, उनके लिए फॉर्म 6 जमा करना अपने आप में गलत डिक्लेरेशन नहीं होगा।
आयोग ने यह भी कहा कि किसी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को केवल इस आधार पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है कि कोई इलेक्टर जो पहले इलेक्टोरल रोल में था, SIR के दौरान या उसके बाद फॉर्म 6 जमा करता है। इसमें यह बात भी जोड़ी गई कि ऐसे मामलों में कार्रवाई तब तक रोकी जाएगी जब तक कि इलेक्टर कहीं और रजिस्टर्ड न हो या उसने कोई झूठी घोषणा न की हो।
दिल्ली हाई कोर्ट का संदर्भ
दिल्ली हाई कोर्ट के 14 अक्टूबर के फैसले का हवाला देते हुए, आयोग ने कहा कि झूठी घोषणा करने की आशंका गलत है। आयोग ने बताया कि फॉर्म 6 में दी गई व्यवस्था अगस्त 2022 से प्रभावी है। मतदान की पात्रता रखने वाले ऐसे नागरिक, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं और वे मसौदा सूची में नहीं हैं, वे फॉर्म 6 का उपयोग करके अपने नाम को पुनः दर्ज कर सकते हैं, बशर्ते कि वे देश के अन्य स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकृत न हों।
यह उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने पहले भी पिछले महीने की शुरुआत में यह स्पष्ट किया था कि जिन राज्यों या निर्वाचन क्षेत्रों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा-पत्र देने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।





