सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर पत्रकारों, स्वतंत्र मीडिया संस्थानों और कार्टूनिस्टों के कंटेंट हटाए जाने तथा अकाउंट प्रतिबंधित किए जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ‘न्यूज़रूम चर्चा’ में इस मुद्दे पर बातचीत के दौरान पत्रकारों ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों, बेरोजगारी, पेट्रोल, संसद और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर सवाल उठाने वाले कंटेंट को निशाना बनाया जा रहा है। चर्चा में संपादक नीरज झा, कार्टूनिस्ट राकेश रंजन और अन्य पत्रकारों ने Meta की कार्यप्रणाली, IT Act और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून को लेकर चिंता जताई।
Instagram पर पत्रकारों और कार्टूनिस्टों के कंटेंट पर कार्रवाई
चर्चा की शुरुआत इस सवाल से हुई कि जब लगातार पोस्ट और वीडियो हटाए जा रहे हैं तो क्या पत्रकारों को सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट करना भी चाहिए? इस पर नीरज झा ने कहा कि कंटेंट हटाना प्लेटफॉर्म का काम हो सकता है, लेकिन पत्रकारों का काम सवाल उठाना और जानकारी लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि Politics India और Politics English जैसे Instagram अकाउंट को भी प्रतिबंधों और रिकमेंडेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
उनके मुताबिक, Recommendation Eligibility बंद होने से किसी अकाउंट की पोस्ट गैर-फॉलोअर्स तक पहुंचना बंद हो जाता है। इससे कंटेंट की पहुंच और प्रभाव दोनों कम हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि कई पोस्ट को बिना स्पष्ट कारण बताए Unavailable किया जा रहा है। स्वतंत्र पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के अकाउंट भी इस तरह की कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं।
कार्टूनिस्ट राकेश रंजन ने बताई अकाउंट हटने की कहानी
चर्चा में शामिल कार्टूनिस्ट राकेश रंजन ने बताया कि उनका Instagram अकाउंट अचानक बंद कर दिया गया। उन्हें केवल IT Act का हवाला दिया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस कार्टून या पोस्ट के कारण कार्रवाई हुई। उनके मुताबिक, करीब आठ-नौ पोस्ट की सूची दिखाई गई, लेकिन रिव्यू के दौरान संबंधित कार्टून देखने का विकल्प भी नहीं मिला।
राकेश रंजन ने बताया कि उनके खिलाफ कार्रवाई फरवरी 2026 में X (पूर्व Twitter) से शुरू हुई थी और अब Instagram तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि वे सरकार के कामकाज पर कार्टून के माध्यम से व्यंग्य और कटाक्ष करते हैं। चर्चा में सतीश आचार्य और मंजुल जैसे अन्य कार्टूनिस्टों के अकाउंट पर भी कार्रवाई का जिक्र हुआ।
IT Act और Safe Harbour को लेकर Meta पर सवाल
पत्रकारों ने IT Act, 2000 की धारा 69 और धारा 79 पर भी चर्चा की। धारा 69 के तहत सरकार को कुछ परिस्थितियों में ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक करने का अधिकार मिलता है, जबकि धारा 79 इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को निर्धारित शर्तों के अधीन Safe Harbour सुरक्षा प्रदान करती है।
चर्चा में आरोप लगाया गया कि Safe Harbour का दर्जा खत्म करने की धमकी के कारण Meta और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सरकारी आदेशों के खिलाफ जाने से बचते हैं। वक्ताओं ने यह भी कहा कि भारत एक बड़ा बाजार है और कंपनियां यहां अपना कारोबार जारी रखने के लिए कंटेंट हटाने का रास्ता चुन सकती हैं।
इसके अलावा, फरवरी 2026 में IT नियमों में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि कुछ मामलों में कार्रवाई की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दी गई। चर्चा में मार्च से जुलाई 2026 के बीच करीब 1.95 लाख कंटेंट टेकडाउन ऑर्डर और प्रतिदिन औसतन 1,275 आदेश मिलने के आंकड़े भी पेश किए गए। इन आंकड़ों के अनुसार Meta के Facebook और Instagram प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में कार्रवाई हुई।
DPDP Act से पत्रकारिता और RTI पर क्या असर पड़ेगा?
कार्यक्रम में Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। चर्चा में वक्ताओं ने आशंका जताई कि इस कानून के प्रावधानों का इस्तेमाल पत्रकारिता और RTI के जरिए मिलने वाली जानकारियों को सीमित करने के लिए किया जा सकता है।
उदाहरण देते हुए बताया गया कि सरकारी भर्ती में अनियमितताओं की जांच के लिए पत्रकार यदि परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों, परिणामों या संबंधित अधिकारियों की जानकारी मांगते हैं, तो उसे व्यक्तिगत डेटा बताकर रोका जा सकता है। पत्रकारों ने यह भी चिंता जताई कि सूत्रों की सहमति और उनकी पहचान से जुड़े नियम खोजी पत्रकारिता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, इन आशंकाओं को कानून के प्रावधानों और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के संदर्भ में देखना जरूरी है।
राहुल गांधी, अमित शाह और लोकतंत्र पर बहस
चर्चा के दौरान राहुल गांधी से जुड़ी एक रैली की खबर, केरल के राज्यपाल से संबंधित राजभवन में मांसाहारी भोजन के विवाद और DPDP Act पर बनाई गई वीडियो हटाए जाने का भी दावा किया गया। इसके अलावा ITBP के डीजी शत्रुजीत कपूर के अरुणाचल प्रदेश संबंधी बयान और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की एक तस्वीर पर चर्चा करने वाले कंटेंट को हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया गया।
कार्यक्रम में अमित शाह के करनाल में प्रस्तावित ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ में शामिल होने की खबर को भी व्यंग्य के साथ उठाया गया। पत्रकारों ने सवाल किया कि जब एक तरफ लोकतंत्र बचाने की बात की जा रही है, तो दूसरी तरफ पत्रकारों और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध क्यों लगाए जा रहे हैं।
अंत में नीरज झा ने कहा कि किसी एक अकाउंट को बंद करने से सूचना का प्रवाह नहीं रुकता। एक पत्रकार या कंटेंट क्रिएटर पर कार्रवाई होने से उस मुद्दे पर बोलने वाले दूसरे लोगों की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और लोकतंत्र की रक्षा केवल पत्रकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। संविधान का अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है और इसकी रक्षा के लिए नागरिकों को भी सवाल उठाने होंगे।
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