मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में गड़बड़ियों (SIR) के विरोध में विपक्षी दलों द्वारा आयोजित दिल्ली प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। कनॉट प्लेस (CP), राजीव चौक और मिंटो रोड से लेकर रामलीला मैदान तक का पूरा इलाका प्रदर्शनकारियों से चोक हो गया।
इस रैली में समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी दलों, कांग्रेस और एनएसयूआई (NSUI) सहित कई विपक्षी दलों के कार्यकर्ता और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की प्रमुख माँग
सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों और विपक्षी कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना था कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते और मतदाता सूची की गड़बड़ियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक लोकतंत्र को बचाना संभव नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह एकजुटता और जन-आक्रोश आवश्यक है।
एक मंच, अनेक जनमुद्दे और विविध भागीदारी
हालाँकि रैली का मुख्य केंद्र बिंदु मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि आम नागरिक अपने-अपने सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर भी इस प्रदर्शन से जुड़े:
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एनसीसी (NCC) कैडेट्स की चिंताएँ: रैली में शामिल एनसीसी कैडेट्स ने 'सी' सर्टिफिकेट के अंकों में कटौती और सेना भर्ती में बदलावों को लेकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
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सामाजिक एवं सुरक्षा मुद्दे: कई लोग महिला सुरक्षा, अपराध के खिलाफ न्याय और बेरोजगारी जैसे विषयों से जुड़े प्लेकार्ड्स लेकर पहुंचे।
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विविध समुदायों का समर्थन: रैली में युवाओं, महिलाओं और क्वीयर (Queer) समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया, हालांकि ग्राउंड पर व्यवहार से जुड़े कुछ विवाद भी देखने को मिले।
मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक का माहौल
कनॉट प्लेस और मिंटो रोड पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। प्रदर्शनकारी "वोट चोर गद्दी छोड़" जैसे नारों और ब्राजीलियन मॉडल की वोटर लिस्ट विवाद से जुड़ी तख्तियों के साथ रामलीला मैदान की ओर बढ़े। विपक्षी दलों के अनुसार, यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि निष्पक्ष मताधिकार और लोकतंत्र को बचाने की राष्ट्रव्यापी लड़ाई का हिस्सा है।





