विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के विरोध में 'इंडिया ब्लॉक' (INDIA Block) ने दिल्ली के कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला। इस मार्च में जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक, देश के कोने-कोने से आए लाखों कार्यकर्ताओं और शीर्ष विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया।
कनॉट प्लेस से मिंटो रोड: विपक्षी एकजुटता का अभूतपूर्व प्रदर्शन
कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल और ऐतिहासिक मिंटो रोड ब्रिज पर किसी एक पार्टी विशेष का नहीं, बल्कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस समेत सभी सहयोगी दलों के झंडे एक साथ लहराते दिखे।
मार्च के दौरान एक खुली बस में विपक्ष के प्रमुख नेता सवार रहे, जबकि उनके पीछे कार्यकर्ताओं का विशाल हुजूम रामलीला मैदान की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए 'एक व्यक्ति, एक वोट' के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की लड़ाई है।
प्रतीक और स्लोगन: उँगलियों का नक्शा और अनोखा विरोध
प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने एक अनोखा सिंबॉलिक विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कटी हुई उँगलियों का उपयोग करके भारत का नक्शा तैयार किया और गले में उँगलियों की माला पहनकर यह संदेश दिया कि एसआईआर (SIR) के नाम पर देश के करोड़ों नागरिकों का मताधिकार छीना गया है।
तख्तियों पर "देश का हलफनामा-ज्ञानेश का जेल जाना", "बुलेट नहीं बैलेट" और "वोट चोर गद्दी छोड़" जैसे कड़े नारे लिखे हुए थे।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रद्द करने की माँग
अयोध्या, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लोगों ने आरोप लगाया कि सुनियोजित तरीके से एक निश्चित वर्ग के पारंपरिक वोटों को काटने का प्रयास किया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की माँग दोहराई।





