विस्तारित सत्र की संभावना
सरकार द्वारा परिसीमन से संबंधित महिला आरक्षण विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए एक विस्तारित सत्र बुलाने की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को जानकारी दी कि यदि वर्तमान सत्र का अवसान नहीं होता है, तो महज दो दिन के नोटिस पर विशेष बैठक आयोजित की जा सकती है। हालाँकि, दोनों सदनों की बैठक 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी, लेकिन अब तक सत्रावसान नहीं हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार प्रस्तावित विधेयक को शीतकालीन सत्र तक टालने की योजना नहीं बना रही है। पिछले बजट सत्र में, पर्याप्त संख्या में सदस्यों का समर्थन न मिलने के कारण यह विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। एक अधिकारी ने कहा, 'अगर सत्रावसान किया गया, तो अगले सत्र के लिए न्यूनतम 14 दिन का नोटिस आवश्यक होगा, लेकिन सत्रावसान न होने की स्थिति में दो दिन में बैठक बुलाई जा सकती है।'
पिछली कोशिशें और द्रमुक की स्थिति
अप्रैल में सरकार ने एक विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक को पारित कराने का प्रयास किया था। संविधान संशोधन के प्रावधान के कारण इस विधेयक को पास कराने के लिए 2-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, जिसे सरकार जुटाने में असफल रही। उस समय विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया।
अब रिपोर्टों के अनुसार, द्रमुक अपना रुख बदल सकती है। चूंकि द्रमुक अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, वह एनडीए के साथ नहीं जुड़ते हुए भी मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन कर सकती है।
लोकसभा अध्यक्ष का बयान
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अनुच्छेद 85 के प्रावधानों का पालन किया जा रहा है। यह अनुच्छेद संसद के सत्र बुलाने और सत्रावसान से संबंधित है।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी कई उदाहरण रहे हैं जब सत्रावसान लंबे समय तक नहीं हुआ। ऐसे मामलों में अवधि 87 दिन तक रही है। 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 और 2013 में 49 दिन और 1963 में 41 दिन तक सत्रावसान नहीं हुआ था। भारत में, संसद का सत्रावसान राष्ट्रपति द्वारा, केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर, औपचारिक रूप से किया जाता है।





