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विपक्ष ने रामलीला मैदान की रैली से पहले बैठक टाली, सरकार के फैसले का इंतजार

इंडिया गठबंधन की बैठक का स्थगित होना, रणनीति पर सवाल उठाता है।

विपक्ष ने रामलीला मैदान की रैली से पहले बैठक टाली, सरकार के फैसले का इंतजार
फोटो: Opposition Postpones Meeting Before Rally at Ram Leela Ground, Awaits Government's Decision

विपक्षी गठबंधन की रैली की तैयारी

विपक्षी गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली का आयोजन किया है। इस रैली से पहले, गुरुवार को इंडिया गठबंधन के दलों के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक होने वाली थी, जिसे अचानक स्थगित कर दिया गया। इस बैठक का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करना था। हालांकि, बैठक को टालने के संबंध में विपक्ष या कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।


रामलीला मैदान की रैली का महत्व इस बात में है कि विपक्ष ने हाल ही में एसआईआर में हुई कथित गड़बड़ियों और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रयास किए हैं। 1 नवंबर को होने वाली रैली का नारा 'वोट बचाओ, देश बचाओ' है, और इसे पिछले दो महीनों से चल रहे प्रदर्शनों को मजबूती प्रदान करने के लिए आयोजित किया जा रहा है।


सुप्रीम कोर्ट में याचिका और विपक्ष की रणनीति

12 अक्टूबर को, इंडिया गठबंधन के दलों ने नागरिक समाज के सदस्यों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इस मार्च के बाद, एक याचिका भी दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एसआईआर की प्रक्रिया में कई खामियां हैं, जिसके कारण कई मतदाता वोट देने से वंचित रह गए हैं। इसके बाद, राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के नेताओं को अपने आवास पर चाय पर आमंत्रित किया।


इसके अतिरिक्त, यह भी चर्चा है कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुला सकती है। इस संदर्भ में, विपक्ष को एक नया मुद्दा मिल सकता है। 1 नवंबर की रैली कांग्रेस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसका एक उद्देश्य देशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एकत्रित करके शक्ति प्रदर्शन करना है।


गृह मंत्री का विपक्ष पर हमला

विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि धरने और प्रदर्शनों से कोई ठोस परिणाम नहीं निकलने वाला है। शाह ने यह भी दावा किया कि भाजपा अगले 30 वर्षों तक सत्ता में बनी रहेगी और जनता की परेशानियों को उठाती रहेगी।


शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पर बिना पूर्व सूचना के विदेश यात्राओं का तंज कसते हुए कहा, 'देश के लोग आपको समझते हैं। आप मेरी बात नहीं सुन सकते, क्योंकि आप कहीं विदेश में बैठे हैं और यह भी नहीं बताते कि विदेश क्यों गए हैं।' उन्होंने आगे कहा कि अगले 30 वर्षों तक भी गांधी के सत्ता में आने का कोई मौका नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ता जनता के बीच रहते हैं और उनकी समस्याओं को समझते हैं।