पंजाब में चुनावी समीकरण
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तिथि नजदीक आ रही है और इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ संभावित गठबंधन के संकेत दिए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंजाब में अगली सरकार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की होगी, जिससे राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
अमित शाह ने दिल्ली में यमुना नदी के पुनरुद्धार से संबंधित परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए कहा, "मैं अभी एक दिन पहले ही पंजाब में था। आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान नशीले पदार्थों के कारोबार में वृद्धि को देखते हुए लोगों ने तय किया है कि 2027 में राज्य में NDA की सरकार बनेगी।"
नए संकेत और गठबंधन की संभावनाएँ
अमित शाह का यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा ने पहले यह स्पष्ट किया था कि वह राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की योजना बना रही थी। उनके बयान के तुरंत बाद भाजपा और अकाली दल के बीच फिर से गठबंधन की बातचीत के संकेत मिल रहे हैं।
अकाली दल ने 26 सितंबर 2020 को केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में NDA से अलग होने का निर्णय लिया था। अब खबरें आ रही हैं कि भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के पुनर्सुरजीत (अकाली के बागी गुट) नेताओं के बीच बातचीत चल रही है। भाजपा एक बड़े गठबंधन के लिए दोनों को एकजुट करने के प्रयासरत है।
भाजपा की रणनीति और अकाली दल का बदलता रुख
भाजपा पंजाब में अपनी चुनावी रणनीति को तैयार करने के लिए जमीनी सर्वेक्षण का सहारा ले रही है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पहले कहा था कि पंजाब में गठबंधन के मुद्दे पर सही समय पर विचार किया जाएगा। हाल ही में, अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र के परिसीमन और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करने का फैसला किया।
इससे पहले, सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद भी भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन की चर्चा शुरू हो गई थी। तब अकाली दल ने कहा था कि जो दरवाजा पहले बंद था, वह अब थोड़ा खुल चुका है। अमित शाह के बयान ने इस चर्चा को और मजबूती प्रदान की है।





