संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान भूमिका पर सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र को आईना दिखाते हुए कहा कि वर्तमान समय में यह संगठन कई वैश्विक चुनौतियों का समाधान नहीं कर पाया है। एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया की व्यवस्था तेजी से बदल रही है, जबकि वैश्विक संस्थान इन परिवर्तनों के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की परिस्थिति को देखते हुए नए समाधानों की आवश्यकता है।
मोदी ने 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को उचित स्थान देने के लिए बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "हमें समझना होगा कि दुनिया की व्यवस्था क्यों बदल रही है और पुरानी प्रणाली उभरती चुनौतियों का समाधान क्यों नहीं कर पा रही है।"
वैश्विक वास्तविकताओं में बदलाव
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वैश्विक वास्तविकताएं बदलती हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया स्थिर रहती है, तो इससे व्यवस्था और वास्तविकता के बीच का अंतर बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि दशकों तक व्यापार ने देशों को जोड़ा, तकनीक ने दूरियों को हटाया और समुद्री मार्गों ने अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ा। हालांकि, अब यह संपर्क नए तनावों का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा, "व्यापार को दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि तकनीकी प्रतिस्पर्धा संघर्ष का नया क्षेत्र बन गई है। समुद्री मार्ग भी भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र बन गए हैं।"
भारत की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
मोदी ने कहा कि वर्तमान चुनौती केवल नई वैश्विक व्यवस्था के उभरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि बदलती दुनिया में एक ऐसी व्यवस्था कैसे बनाई जाए जो नई वास्तविकताओं को स्वीकार करे और वैश्विक संस्थानों की प्रभावशीलता को बढ़ाए। उन्होंने कहा, "यही वह स्थान है जहाँ भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।"
उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल सुखद समय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संकट के समय भी प्रभावी रहना चाहिए। इसके लिए सभी पक्षों के बीच एक प्रभावी सहमति की आवश्यकता है। मोदी ने कहा, "दुनिया को यह एहसास हो गया है कि वैश्विक व्यवस्था केवल ताकत और स्वार्थ के आधार पर नहीं चल सकती।"
संयुक्त राष्ट्र की ऐतिहासिक भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दशकों तक संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक सहयोग और शांति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, समय के साथ दुनिया में बदलाव आए हैं, नई आकांक्षाएं उभरी हैं और नई अर्थव्यवस्थाओं तथा शक्तियों का उदय हुआ है।
उन्होंने कहा, "हालांकि संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थानों की ऐतिहासिक भूमिका रही है, आज की चुनौतियों के सामने उनकी सीमाएं स्पष्ट होती जा रही हैं।"





