पंजाब में राजनीतिक बदलाव की तैयारी
पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ आ रहा है, जहां शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन करने का निर्णय लिया है। दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार, इस गठबंधन के तहत यदि सरकार बनती है, तो मुख्यमंत्री पद अकाली दल को मिलेगा। बीजेपी इस बार 35 से 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है, जबकि शेष 67 सीटों पर अकाली दल चुनाव लड़ेगा। यह उल्लेखनीय है कि 1997 से 2017 तक बीजेपी केवल 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी।
दिवाली के बाद होगा औपचारिक ऐलान
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस गठबंधन की औपचारिक घोषणा दिवाली के तुरंत बाद बठिंडा में एक रैली के माध्यम से की जाएगी। इस रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दोनों दलों के प्रमुख नेता एक मंच पर उपस्थित रहेंगे। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने भी 2027 में पंजाब में NDA की सरकार बनने का दावा किया था, जिससे इस गठबंधन की संभावना और मजबूत हुई है।
बागी गुट के लिए गठबंधन में जगह मुश्किल
राजनीतिक चर्चाओं में यह बात सामने आई थी कि अकाली दल से अलग हुए बागी गुट, जैसे अकाली दल पुनर्सुरजीत, भी इस गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन अब यह संभव नहीं लग रहा है, क्योंकि यह गुट अभी तक एक रजिस्टर्ड पार्टी में तब्दील नहीं हो पाया है। इस स्थिति में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी या अकाली दल का चुनाव चिह्न अपनाना होगा।
हरसिमरत कौर की मंत्री के रूप में वापसी की संभावना
गठबंधन बनने की स्थिति में अकाली दल को केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल को एक बार फिर से मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाया जा सकता है। रवनीत बिट्टू के हटने से पंजाब का कोई प्रतिनिधित्व नहीं रह गया है, इसलिए यह कदम चुनाव से पहले वोटरों को लुभाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास होगा।
सुखबीर बादल ने गठबंधन के संकेत दिए
अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी इस गठबंधन को लेकर अनिच्छा नहीं दिखाई है। हाल में दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि जिन दलों की सोच उनके अनुरूप है, उनके साथ गठबंधन के लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं। उनकी पत्नी हरसिमरत कौर ने भी इसी प्रकार के संकेत पहले ही दिए हैं।





