मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इजरायली हमलों में अब तक ईरान में 639 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें शीर्ष सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक शामिल हैं। वहीं, इजरायली सरकार का दावा है कि ईरान की ओर से हुई मिसाइल और ड्रोन हमलों में कम से कम दो दर्जन नागरिक मारे गए हैं। रॉयटर्स ने अभी तक इन मौतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। इजरायल ने ईरान पर आरोप लगाया है कि उसने क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया है, जो बड़े इलाके में छोटे विस्फोटकों को फैला देते हैं और नागरिकों को निशाना बनाते हैं। इस पर संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इस संकट के बीच यूरोपीय देशों ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। जिनेवा में शुक्रवार को ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्री ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची के साथ वार्ता करने वाले हैं। ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड लैमी ने कहा, "अब समय आ गया है कि पश्चिम एशिया में हिंसा को रोका जाए। इससे किसी का भला नहीं होगा।" व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। ट्रंप ने कहा है कि वह अगले दो सप्ताह में तय करेंगे कि अमेरिका को इस युद्ध में सैन्य रूप से शामिल होना चाहिए या नहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह "बंकर बस्टर" बम से ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों पर हमला करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इजरायल के हमलों की निंदा की है और तनाव को कम करने की अपील की है। क्रेमलिन ने कहा कि दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति बहाल करने की आवश्यकता पर सहमति जताई है।





