अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 70% अमेरिकी उनके कामकाज से असंतुष्ट हैं। इस स्थिति ने आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले उनकी अपनी पार्टी (रिपब्लिकन) में गहरी चिंता और बगावत के संकेत पैदा कर दिए हैं। पार्टी नेताओं को डर है कि ट्रम्प का साथ उनके लिए चुनावी नुकसान का सौदा साबित हो सकता है।
सर्वे के मुख्य आंकड़े और अर्थव्यवस्था का संकट AP-NORC और अन्य सर्वे रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प की स्थिति इन मोर्चों पर कमजोर दिखती है:
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कुल अप्रूवल रेटिंग: केवल 30% अमेरिकी ही ट्रम्प के समग्र कामकाज से संतुष्ट हैं।
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अर्थव्यवस्था और महंगाई: अर्थव्यवस्था पर उनका समर्थन महज 26% है, जबकि महंगाई से निपटने के मामले में यह गिरकर केवल 17% रह गया है।
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महंगाई का ठीकरा: 65% से अधिक अमेरिकी लगातार बढ़ रही कीमतों के लिए सीधे तौर पर ट्रम्प की नीतियों और टैरिफ फैसलों को जिम्मेदार मानते हैं।
रिपब्लिकन नेताओं की बगावत और दूरी नुकसान से बचने के लिए कई रिपब्लिकन उम्मीदवार और सांसद अब राष्ट्रपति ट्रम्प से खुलकर दूरी बना रहे हैं:
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कई नेताओं ने अपनी चुनावी वेबसाइटों से ट्रम्प और उनके 'अमेरिका First' एजेंडे का जिक्र हटा दिया है।
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आयोवा के सांसद और सीनेट उम्मीदवारों ने ईरान युद्ध को जल्द खत्म करने की मांग की है और ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाले विधेयकों का समर्थन किया है।
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विस्कॉन्सिन, एरिजोना और जॉर्जिया जैसे राज्यों में गवर्नर और संसद की रेस में उतरने वाले कई कट्टर समर्थक नेता भी अब अकेले प्रचार करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
डेमोक्रेट्स की बढ़त और ओहायो का हाल राष्ट्रीय स्तर पर भी रिपब्लिकन पार्टी पिछड़ती नजर आ रही है। कांग्रेस के जेनेरिक बैलट में डेमोक्रेट्स की बढ़त 9 अंकों तक पहुंच गई है, जो हाउस और सीनेट में रिपब्लिकन बहुमत के लिए बड़ा खतरा है। इसके अलावा, ट्रम्प के मजबूत गढ़ माने जाने वाले ओहायो में गवर्नर पद की रेस में भारतवंशी विवेक रामास्वामी भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार से पीछे चल रहे हैं।
इन तमाम राजनीतिक घटनाक्रमों ने रिपब्लिकन रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि वे महंगाई के खिलाफ प्रचार करना चाहते हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति की नीतियों से पूरी तरह मुंह नहीं मोड़ पा रहे हैं।





