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चुनाव • दिल्ली

INDIA Bloc का चुनाव आयोग के खिलाफ हल्ला बोल: राहुल-प्रियंका पर एफआईआर और लंच डिप्लोमेसी से सियासत गरमाई

चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन, राहुल-प्रियंका पर एफआईआर दर्ज।

INDIA Bloc का चुनाव आयोग के खिलाफ हल्ला बोल: राहुल-प्रियंका पर एफआईआर और लंच डिप्लोमेसी से सियासत गरमाई
फोटो: INDIA Bloc protest, Election Commission, Rahul Gandhi FIR, Gyanesh Kumar, Voter list SIR

नई दिल्ली:

देश की राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी उग्र बना हुआ है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। वोटर लिस्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और कथित धांधलियों के गंभीर मुद्दों को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता सड़क पर उतर आए हैं। इस बीच दिल्ली पुलिस द्वारा कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है।

वोटर लिस्ट और SIR प्रक्रिया पर विपक्ष का कड़ा ऐतराज

विपक्ष का मुख्य आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की जा रही हैं, जिसके तहत पात्र मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी नहीं है और इससे लोकतंत्र की निष्पक्षता पर सीधा असर पड़ रहा है। इसी के विरोध में INDIA ब्लॉक ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है।

राहुल और प्रियंका पर एफआईआर, आकाशवाणी भवन में हुआ था विवाद

मंगलवार को निकाले गए ऐतिहासिक मार्च के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेता बिना अनुमति आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर गए और वहां लगभग नौ घंटे तक धरने पर बैठे रहे। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने आकाशवाणी की शिकायत के आधार पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। इसके बावजूद कांग्रेस सांसदों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 'लंच डिप्लोमेसी' और रणनीति

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आज दिल्ली में 'इंडिया' गठबंधन के सभी विपक्षी सांसदों को दोपहर के भोज (लंच) पर आमंत्रित किया है। इस बैठक में मंगलवार के प्रदर्शन की समीक्षा के साथ-साथ आगे की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है। विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की मांग वाले एक साझा पत्र पर भी हस्ताक्षर कर रहे हैं, ताकि आयोग पर दबाव बनाया जा सके।

आम आदमी पार्टी (AAP) और अन्य दलों का खुला समर्थन

मंगलवार के मार्च से दूरी बनाए रखने के बाद, आज आम आदमी पार्टी (AAP) ने खुलकर इस आंदोलन में शिरकत की है। AAP नेता सौरभ भारद्वाज और पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन किया। इसके अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), वाम दल और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों ने भी इस विरोध प्रदर्शन को समर्थन दिया है। ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) के भी इस मुहिम के साथ तालमेल बिठाने के संकेत मिले हैं, जिससे यह गठबंधन और मजबूत होता नजर आ रहा है।

चुनाव आयोग का दौरा टला और बढ़ाई गई सुरक्षा

विपक्षी दलों के इस आक्रामक तेवर और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का छत्तीसगढ़ का दो दिवसीय दौरा स्थगित कर दिया गया है। साथ ही, दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय, जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

बीजेपी और सरकार का तीखा पलटवार

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के इस पूरे घटनाक्रम को मात्र एक 'राजनीतिक नाटक' करार दिया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और अन्य भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह का दबाव बनाना और झूठे आरोप लगाना पूरी तरह गलत है। भाजपा ने विपक्ष से जनादेश का सम्मान करने और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की अपील की है।

आगे के जन-आंदोलन की तैयारी

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक दिन की नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए इसे बड़े जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा। आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में इस मुद्दे पर और भी प्रदर्शन करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है।