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कौन है वो सात निर्दलीय, जिन्होंने 18वीं लोकसभा चुनाव में जीता चुनाव

कौन है वो सात निर्दलीय, जिन्होंने 18वीं लोकसभा चुनाव में जीता चुनाव
फोटो: कौन है वो सात निर्दलीय, जिन्होंने 18वीं लोकसभा चुनाव में जीता चुनाव

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों की तो बात हो रही है लेकिन इस बार 7 निर्दलीय प्रत्याशी भी जीते हैं, जिसके बारे में बात करना बेहद जरूरी है। ये नवनिर्वाचित सांसद देश के अलग-अलग इलाकों का लोकसभा के सदन में प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। आइए,  इन सभी नवनिर्वाचित निर्दलीय सांसदों के बारे में जानते हैं।

राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव 

पप्पू यादव के नाम से मशहूर राजेश रंजन लंबे समय से बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक दिग्गजों में से एक है। पिछले कुछ सालों में वे कई पार्टियों से जुड़े रहे हैं। लालू प्रसाद की आरजेडी और रामविलास पासवान की एलजेपी के साथ-साथ मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी से भी रहे हैं। उन्होंने 2015 में अपनी खुद की पार्टी जन अधिकार पार्टी भी बनाई थी, जिसका 2024 के चुनावों से पहले कांग्रेस में विलय हो गया था। पप्पू यादव ने पूर्णिया से जेडीयू के संतोष कुमार को 23 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।



अमृतपाल सिंह
कट्टरपंथी प्रचारक और ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल सिंह वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में हैं। उन्होंने पंजाब की खडूर साहिब सीट पर कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को 1,97,120 मतों के अंतर से हराया हैं। अमृतपाल ने पंजाब के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य का दोहन करके बहुत कम समय में अपना राजनीतिक करियर बनाया है। एक संपन्न निर्माण परिवार से ताल्लुक रखने वाला 2022 में दुबई से लौटा था।


विशाल पाटिल 
महाराष्ट्र विकास अघाड़ी में सीट बंटवारे के दौरान सांगली सीट उद्धव ठाकरे की शिवसेना के खाते में जाने के बाद कांग्रेस पार्टी के लंबे समय से नेता रहे विशाल 'दादा' पाटिल ने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा। उन्होंने सांगली सीट पर बीजेपी नेता संजय काका पाटिल को 1 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से शिकस्त दी। निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने के बावजूद पाटिल ने कांग्रेस पार्टी को अपना समर्थन दिया है।


सरबजीत सिंह खालसा

इंदिरा गांधी के हत्यारों में से एक बेअंत सिंह का बेटेा सरबजीत सिंह खालसा फरीदकोट लोकसभा सीट से विजयी हुआ है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के करमजीत सिंह अनमोल को 70,053 वोटों से हराया। खालसा को फरीदकोट की ‘संगत’ ने चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।


उमेशभाई बाबूभाई पटेल

सामाजिक कार्यकर्ता उमेशभाई बाबूभाई पटेल दमन और दीव से लोकसभा सीट पर विजयी हुए। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश से तीन बार के सांसद बीजेपी के दिग्गज लालू पटेल को 6,225 मतों के अंतर से हराया, उन्हें 42,523 मत मिले जबकि पटेल को 36,298 मत मिले। उन्होंने इससे पहले 2004 के लोकसभा चुनावों में बठिंडा सीट और 2007 के पंजाब विधानसभा चुनावों में भदौर सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2014 के लोकसभा चुनावों में, उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर फतेहगढ़ साहिब सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।



शेख अब्दुल
 

राशिद शेख अब्दुल राशिद, जिन्हें इंजीनियर राशिद के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत तिहाड़ जेल में हैं। 56 वर्षीय राशिद ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हराकर बारामूला लोकसभा सीट जीती। राशिद को 2, 47,0000 वोट मिले, जबकि उमर अब्दुल्ला को 2,68,000 वोट मिले। पूर्व विधायक राशिद को 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया था और वह कड़े आतंकवाद विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार होने वाले पहले मुख्यधारा के राजनेता थे।


मोहम्मद हनीफा

मोहम्मद हनीफा लद्दाख निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व जिला प्रमुख हैं। वह लद्दाख से जीत हासिल करने वाले चौथे निर्दलीय हैं। हनीफा ने कांग्रेस के त्सेरिंग नामग्याल को 65,303 वोटों से हराया।