नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों पर पुलिसिया कार्रवाई का एक और गंभीर मामला सामने आया है। स्वतंत्र पत्रकार अमान ने अपने साथ हुई बदसलूकी और पुलिस के पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
नाबालिग की गिरफ्तारी पर सवाल उठाने पर मिली सजा
पत्रकार अमान के अनुसार, 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान जब उन्होंने एक नाबालिग (Juvanile) बच्चे को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का कारण और कानूनी आधार पूछा, तो पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। इसके कुछ ही समय बाद जब उन्होंने अन्य पत्रकारों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए, तो एसीपी के आदेश पर उन्हें जबरन पुलिस बस में बैठाकर डिटेन कर लिया गया।
नाम और रिपोर्टिंग पर सांप्रदायिक टिप्पणी
हिरासत के दौरान पुलिस की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए अमान ने बताया:
"मेरा पहला नाम 'अमान' देखकर पुलिस अधिकारियों की त्योरियां चढ़ गईं। वे मेरी रिपोर्टिंग और विचारधारा पर सवाल उठाने लगे। जब उन्होंने यूट्यूब पर गाज़ा पर मेरी रिपोर्ट देखी, तो मुझ पर पक्षपात के आरोप लगाने लगे।"
प्रेस आईडी नाले में फेंकी, फोन का शीशा तोड़ा
उत्पीड़न का सिलसिला यहीं नहीं थमा। अगले दिन 11 अक्टूबर को जब वे कनॉट प्लेस (CP) जा रहे थे, तो मिंटो रोड पर उन्हें रोक लिया गया। वायरल वीडियो से पहचान कर पुलिसकर्मियों ने उनका फोन छीनने की कोशिश की, जिससे उनके फोन का बैक ग्लास टूट गया। इसके बाद उनकी प्रेस आईडी छीनकर नाले में फेंक दी गई और उन्हें "यूट्यूबर" कहकर अपमानित किया गया।
अमान ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस एक खास विचारधारा के तहत काम कर रही है, जहाँ राइट-विंग इन्फ्लुएंसर्स को छूट दी जा रही है, जबकि जनता और संविधान के सवाल उठाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है।
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