इसी बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इज़रायल की सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए एक गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने स्पष्ट रूप से कह दिया था कि ईरान फिलहाल परमाणु हथियार बनाने की प्रक्रिया में नहीं है, तो फिर आखिर इज़रायल ने हमला क्यों किया? उमर अब्दुल्ला ने कहा, "मुझे समझ नहीं आ रहा कि इज़रायल ने ईरान पर हमला करने का निर्णय किन तथ्यों के आधार पर लिया। कुछ ही दिन पहले अमेरिकी खुफिया प्रमुख ने अमेरिकी कांग्रेस को यह बताया था कि ईरान फिलहाल परमाणु बम बनाने के करीब नहीं है। तो फिर अचानक ऐसा क्या बदल गया कि इज़रायल ने इतने बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी?"
वहीं इस संकटपूर्ण स्थिति के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंधु’ शुरू किया है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि इस विशेष बचाव अभियान के तहत अब तक 500 से अधिक भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकाला जा चुका है।
यह ऑपरेशन बुधवार को उस वक्त शुरू किया गया जब ईरान में युद्ध की वजह से भारतीय समुदाय के लोग दहशत और असुरक्षा के माहौल में फंस गए थे। भारत सरकार ने तेज़ी से प्रतिक्रिया देते हुए एयरलिफ्ट और अन्य राजनयिक उपायों का सहारा लेकर अपने नागरिकों को निकालना शुरू किया।
ऑपरेशन सिंधु के तहत भारत न केवल अपने नागरिकों को बल्कि नेपाल और श्रीलंका के निवासियों को भी ईरान से सुरक्षित बाहर निकाल रहा है। दोनों देशों ने भारत से मानवीय सहायता की अपील की थी, जिसके जवाब में भारत ने अपनी विदेश नीति के ‘पड़ोसी पहले’ सिद्धांत को निभाते हुए उनकी मदद का भरोसा दिलाया। अब तक दर्जनों नेपाली और श्रीलंकाई नागरिकों को भी इस ऑपरेशन के तहत बचाया जा चुका है।
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