इस साल अगस्त में अकाल तख्त द्वारा नियुक्त पांच सदस्यीय पैनल ने सुखबीर को 'तनखैया' घोषित किया था। उनकी सजा की मात्रा या "तंखा" की घोषणा अभी तक नहीं की गई है। सुखबीर बादल पर उनकी सरकार के वक्त डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को माफी देने के अलावा श्री गुरू ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले में कार्रवाई न करने का आरोप लगा था। इस पूरे मामले की शुरुआत 1 जुलाई से हुई, जब अकाली दल का बागी गुट श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचा था। इस दौरान जत्थेदार को माफीनामा सौंपा गया था। जिसमें सुखबीर बादल से हुई 4 गलतियों में सहयोग देने पर माफी मांगी गई।
सुखबीर सिंह बादल का नेतृत्व
सुखबीर 2008 से पार्टी अध्यक्ष थे। उनके नेतृत्व में पार्टी ने 2012 में पंजाब में लगातार दूसरी सरकार बनाई थी। हालाँकि, इसके बाद से पार्टी चुनाव हारने लगी। 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में अब उसके केवल तीन विधायक हैं। 29 अगस्त को बादल ने पार्टी के वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भूंदड़ को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था। भूंदड़ ने 18 नवंबर को चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय कार्यालय में पार्टी की कार्यसमिति की आपात बैठक बुलाई है। कमेटी सुखबीर द्वारा दिए गए इस्तीफे पर विचार करेगी और आगे की कार्रवाई तय करेगी।
क्या है डेरा सच्चा सौदा का मामला
2007 में सलाबतपुरा में गुरमीत राम रहीम ने 10वें गुरू श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की परंपरा का अनुकरण करते हुए, उन्हीं की तरह कपड़ों को पहनकर अमृत छकाने का स्वांग रचा था। उस वक्त इसके खिलाफ पुलिस केस भी दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में अकाली सरकार ने सजा देने की जगह इस मामले को ही वापस ले लिया था। श्री अकाल तख्त साहिब ने कार्रवाई करते हुए डेरा मुखी को सिख पंथ से निष्कासित कर दिया था। सुखबीर सिंह बादल ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए डेरा मुखी को माफी दिलवा दी थी। इसके बाद अकाली दल और शिरोमणि कमेटी के नेतृत्व को सिख पंथ के गुस्से और नाराजगी का सामना करना पड़ा। अंत में श्री अकाल तख्त साहिब ने डेरा मुखी को माफी देने का फैसला वापस ले लिया था।





