बैठक को लेकर ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि सेबी के कामकाज की समीक्षा के साथ माधबी से वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर सवाल ज़वाब हो सकते थे। बैठक से पहले बुच ने पीएसी के सामने पेश होने से छूट मांगी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वहीं, बीजेपी माधबी को बुलाए जाने को लेकर पीएसी का लगातार विरोध कर रही है। बीजेपी ने बैठक में शामिल होने वाले बीजेपी के नेताओं को व्हिप जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि व्हिप में माधबी से जब सवाल-ज़वाब हो तो उसका उसी दौरान विरोध करें। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार ने माधबी को अपनी जाँच में आरोप-मुक़्त कर दिया है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा
लोक लेखा समिति के प्रमुख और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एएनआई से कहा, “समिति की पहली बैठक में ही हमने अपने विनियामक निकायों की समीक्षा के लिए एक स्वत: संज्ञान विषय रखने का निर्णय लिया। इसीलिए हमने आज सुबह सेबी अध्यक्ष को सेबी की समीक्षा के लिए बुलाया। समिति शाखा संबंधित लोगों को नोटिस भेजती है। सबसे पहले सेबी अध्यक्ष ने समिति के समक्ष उपस्थित होने से छूट मांगी, जिसे हमने अस्वीकार कर दिया। उसके बाद उन्होंने पुष्टि की कि वह और उनकी टीम इस बैठक में उपस्थित रहेंगी। आज सुबह उन्होंने मुझे सूचित किया कि वह दिल्ली की यात्रा करने की स्थिति में नहीं हैं। एक महिला के अनुरोध पर विचार करते हुए हमने सोचा कि आज की बैठक को किसी अन्य दिन के लिए स्थगित करना बेहतर है।”
अमेरिका स्थित, हिंडनबर्ग रिसर्च की अडानी को लेकर अंतिम रिपोर्ट में कई नए खुलासे किये गए थे। रिपोर्ट्स में अडानी, माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच पर आरोप लगाया गया कि बुच के निवेश कथित तौर से 'अडानी स्टॉक हेरफेर' से जुड़े है। हालाँकि, माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने आरोपों को ख़ारिज़ किया है।





