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शिरोमणि अकाली दल में बग़ावत, वरिष्ठ नेताओं ने सुखबीर सिंह बादल से इस्तीफ़ा माँगा

वरिष्ठ अकाली नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावनाओं को स्वीकार करते हुए सुखबीर बादल को इस्तीफा देना चाहिये। उन्हें पार्टी अध्यक्ष ऐसे व्यक्ति को बनाना चाहिये जो अकाली दल को मजबूत कर सके और राजनीति और धर्म के बीच संतुलन बनाये

शिरोमणि अकाली दल में बग़ावत, वरिष्ठ नेताओं ने सुखबीर सिंह बादल से इस्तीफ़ा माँगा
फोटो: शिरोमणि अकाली दल में बग़ावत, वरिष्ठ नेताओं ने सुखबीर सिंह बादल से इस्तीफ़ा माँगा
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अकालियों के सारे वरिष्ठ नेता अब सुखबीर के खिलाफ हो गये हैं। पार्टी के भीतर दो गुट बन गये है, जिनके बीच की गुटबाजी चरम पर पहुंच गयी है। पार्टी में एक गुट वरिष्ठ नेताओं का है, जबकि दूसरा गुट खुद अकाली दल प्रमुख और पूर्व उप-मुख्यमंत्री बादल का है। गुटों की वजह से पार्टी टूटने की कगार पर पहुंच गयी है। वरिष्ठ नेताओं के गुट ने मंगलवार को बैठक कर अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल से इस्तीफ़ा मांग लिया है। इनका कहना है कि बादल के नेतृत्व की वजह से ही पार्टी का लोकसभा के चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन रहा है। हालांकि दूसरे गुट ने सुखबीर बादल पर भरोसा जताया है और उनके पक्ष में खड़े हुए हैं। आम चुनाव में अकाली दल पंजाब की 13 सीटों में से सिर्फ एक ही सीट पर जीत दर्ज़ कर पाया है।

अकाली दल को कमज़ोर किया जा रहा है
वरिष्ठ नेताओं के गुट ने अपनी बैठक जालंधर में की। पार्टी के प्रदर्शन से नाराज़ इस गुट ने मीडिया से कहा कि वे लोग 1 जुलाई से 'शिरोमणि अकाली दल बचाओ' आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। दूसरे गुट के बैठक की अध्यक्षता बादल ने चंडीगढ़ में की। बादल समर्थकों ने आंदोलन को भाजपा समर्थक नेताओं की जमात कहा। उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारों पर अकाली दल को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है।

जालंधर की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे वरिष्ठ अकाली नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि पार्टी में जल्द से जल्द नेतृत्व परिवर्तन होना चाहिये। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावनाओं को स्वीकार करते हुए सुखबीर बादल को इस्तीफा देना चाहिये। उन्हें पार्टी अध्यक्ष ऐसे व्यक्ति को बनाना चाहिये जो अकाली दल को मजबूत कर सके और राजनीति और धर्म के बीच संतुलन बनाये रख सके।

पंजाब के प्रमुख अखबारों में से एक 'अजीत' के प्रधान संपादक बरजिंदर सिंह हमदर्द भी सुखबीर के खिलाफ हो गये हैं। अजीत अख़बार अकालियों का थिंक टैंक माना जाता है। मंगलवार को जालंधर में हुई बैठक तीसरी ऐसी बैठक थी जहां बगावत के स्वर उठे। ख़बरों के अनुसार, नेतृत्व परिवर्तन की मांग पहली बार 14 जून को चंडीगढ़ में कोर कमेटी की बैठक के दौरान उठायी गयी थी।

सुखबीर की बैठक
सुखबीर ने बैठक को मुख्य तौर पर हार की समीक्षा करने के लिए बुलाया था। बैठक में आये कार्यकर्ताओं और नेताओं ने बादल के पार्टी नेतृत्व और दूरदर्शी सोच की खूब तारीफ़ की। बादल के वफ़ादार माने जाने वाले नेता बलविंदर सिंह भुंडर, महेशिंदर सिंह ग्रेवाल और दलजीत सिंह चीमा ने असंतुष्ट नेताओं की मांगों पर अपनी असहमति जतायी। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ नेता बीजेपी के कहने पर पार्टी के विरुद्ध काम कर रहे हैं।