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जयशंकर-वांग यी की बैठक: क्या भारत-चीन संबंधों में आएगी नई गर्माहट?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने भारत-चीन संबंधों को और सामान्य बनाने के उपायों पर चर्चा की। वार्ता के दौरान कैलाश मानसरोवर |

जयशंकर-वांग यी की बैठक: क्या भारत-चीन संबंधों में आएगी नई गर्माहट?
फोटो: Jaishankar - Wang Y, India-China relations
भारत ने यूक्रेन संघर्ष पर अपने रुख में महत्वपूर्ण परिवर्तन करते हुए इसे पहले की तरह "संघर्ष में दो पक्षों" के बजाय अब "संबंधित पक्षों" की संज्ञा दी है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-रूस वार्ता और ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन की रणनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। हाल ही में रियाद में अमेरिकी और रूसी प्रतिनिधिमंडल युद्ध समाप्ति के संभावित तरीकों पर चर्चा के लिए मिले, लेकिन इस वार्ता से यूक्रेन को बाहर रखा गया। यह घटनाक्रम यूरोप के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह बाइडेन प्रशासन की उस नीति के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि यूक्रेन को वार्ता से बाहर रखकर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।

भारत-चीन संबंधों में नई पहल


इसी बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने भारत-चीन संबंधों को और सामान्य बनाने के उपायों पर चर्चा की। वार्ता के दौरान कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा को फिर से शुरू करने पर भी विचार किया गया। यह संवाद उस सहमति के बाद हुआ, जो पिछले वर्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए बनी थी। दोनों देशों के बीच यह बैठक संबंध सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भारत की संतुलित कूटनीति


विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद भारत के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत संवाद और कूटनीति का समर्थक है और अब दुनिया उम्मीद कर रही है कि “संबंधित पक्ष” युद्ध समाप्त करने के लिए आपसी समझौते पर पहुंचेंगे। यह बयान भारत के पहले के रुख से थोड़ा भिन्न है, जहां केवल युद्धरत पक्षों की ही बात की गई थी। इस नए दृष्टिकोण में अमेरिका और यूरोप को भी संभावित रूप से शामिल किया जा सकता है। 

 स्विट्जरलैंड में आयोजित यूक्रेन शांति सम्मेलन में भी भारत के इस रुख के संकेत मिले थे, जहां भारत ने रूस की अनुपस्थिति के चलते संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। अब स्थिति बदल चुकी है—रूस वार्ता में शामिल है, लेकिन यूक्रेन को बाहर रखा गया है। भारत ने हमेशा युद्ध समाप्ति के लिए कूटनीति को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से स्पष्ट कर चुके हैं कि “यह युद्ध का युग नहीं है” और संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं निकलेगा।

रियाद में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के बाद रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने जोहान्सबर्ग में जी-20 बैठक के दौरान एस. जयशंकर से भी चर्चा की। जयशंकर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने भारत-रूस सहयोग की समीक्षा की और यूक्रेन संघर्ष पर हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा की। भारत अपनी कूटनीतिक स्थिति को संतुलित रखते हुए वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति तय कर रहा है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ जयशंकर की यह बैठक दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई। यह दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच जारी वार्ताओं की एक महत्वपूर्ण कड़ी थी। दोनों पक्षों ने पिछले साल एलएसी के लद्दाख सेक्टर में डेमचोक और देपसांग के दो "घर्षण बिंदुओं" से अग्रिम पंक्ति के सैनिकों को हटाने पर सहमति जताई थी।

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