यह पहली बार नहीं है जब दोनों गुटों के पुनर्मिलन की अटकलें तेज हुई हैं। इससे पहले, शरद पवार ने एक बयान में कहा था कि पार्टी में दो विचार हैं—एक यह कि हमें अजित पवार गुट के साथ जुड़ जाना चाहिए, जबकि दूसरा यह कि भाजपा के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन नहीं होना चाहिए। शरद पवार ने इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को दिया है।
सुप्रिया सुले और अजित पवार, दोनों ने हाल ही में ऐसे संकेत दिए हैं जो इस बात को बल देते हैं कि एनसीपी में एकता की दिशा में बातचीत चल रही है। सुप्रिया सुले ने कहा था कि एनसीपी की स्थापना शरद पवार ने की थी, और पार्टी को मजबूत बनाने में कई नेताओं ने योगदान दिया है।
वहीं, अजित पवार गुट ने भी कहा है कि अगर शरद पवार गुट की ओर से कोई प्रस्ताव आता है, तो उस पर विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि दोनों गुट फिलहाल 10 जून को अलग-अलग स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित करेंगे। शरद पवार गुट पुणे में सुबह के समय कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को संबोधित करेगा, जबकि अजित पवार गुट अपने स्थापना दिवस का कार्यक्रम उसी शाम पुणे में आयोजित करेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि एनसीपी के दोनों गुटों के पुनर्मिलन से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है। मनसे और शिवसेना (यूबीटी) के साथ संभावित गठबंधन के बीच यह घटनाक्रम राज्य में सियासी समीकरणों को और जटिल बना सकता है।
सियासी हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर दोनों गुट एकजुट होते हैं, तो इससे भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। वहीं, पवार परिवार का फिर से एकजुट होना न केवल एनसीपी के भीतर स्थिरता लाएगा, बल्कि राज्य की राजनीति में भी नई दिशा तय कर सकता है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाकई दोनों गुटों के बीच कोई समझौता होता है, और अगर होता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति पर कितना असर डालेगा। इस घटनाक्रम से आने वाले दिनों में कई अहम फैसले और सियासी रणनीतियां तय होंगी।





