कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "बदले की राजनीति" करार दिया है। पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एएनआई से बातचीत में कहा, यह पूरा मामला प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। हम इसका जवाब अदालत में देंगे, लेकिन सड़कों पर हमारे कार्यकर्ताओं का आक्रोश इस बात का प्रमाण है कि देश की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता अब चुप नहीं बैठेंगे।"
श्रीनेत ने आगे कहा कि,
"राहुल गांधी वही नेता हैं जो प्रधानमंत्री से डरते नहीं। यह चार्जशीट एक झूठे और बेबुनियाद मामले पर आधारित है। इसमें मनी लॉन्डिंग का आरोप लगाया गया है, जबकि न कोई धन हेरा-फेरी हुई, न ही कोई संपत्ति का हस्तांतरण हुआ।"
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा,
"हमारे पास न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। यह विपक्ष की आवाज को दबाने का एक प्रयास है।"
वहीं पार्टी की प्रवक्ता रागिनी नायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "जब मोदी डरते हैं, तब ईडी, सीबीआई और पुलिस आगे कर दी जाती हैं। ये एजेंसियां विपक्ष के खिलाफ 95 प्रतिशत मामलों में किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पातीं। क्या एक ऐसा गैर-लाभकारी संगठन, जिसके पास कोई आय, संपत्ति या व्यावसायिक लेन-देन नहीं है, उसके खिलाफ मनी लॉन्डिंग का आरोप लगाना हास्यास्पद नहीं है?"
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यंग इंडिया एक नॉन-प्रॉफिट संगठन है, जिससे न तो कोई आर्थिक लाभ हुआ है और न ही किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है। फिर भी ईडी की ओर से 12 साल पुराने मामले में अंतिम समय में चार्जशीट दाखिल किया जाना कई सवाल खड़े करता है।





