स्थापना दिवस समारोह में अजीत पवार ने अपने पुराने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि 2023 में एनडीए में शामिल होने का निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। उन्होंने कहा,
“हम संत नहीं हैं। हमारा उद्देश्य लोगों की समस्याओं को उठाना, दिशा देना और समावेशी राजनीति करना है। सिर्फ विपक्ष में बैठना और नारे लगाना पर्याप्त नहीं होता।”
अजीत पवार ने एनडीए के साथ अपने गठबंधन पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि गठबंधन राजनीति में नया कुछ नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अतीत में चंद्रबाबू नायडू और ममता बनर्जी जैसे नेता भी एनडीए का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य गरीबों और वंचित वर्गों का सशक्तिकरण है।
हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन को स्वीकार करते हुए उन्होंने आत्ममंथन की बात कही और कार्यकर्ताओं से आगामी नगर निकाय चुनावों की तैयारी में जुटने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी इशारा किया कि स्थानीय स्तर पर मजबूत नेताओं को पार्टी में अवसर दिया जाएगा, लेकिन जिम्मेदारी केवल उन्हीं को मिलेगी जो मैदान में खुद को साबित करेंगे।
दूसरी ओर, शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने स्थापना दिवस पर अलग कार्यक्रम में शिरकत की। विलय की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह निर्णय पारिवारिक संवाद और आपसी चर्चा का विषय है, न कि कैमरे पर सार्वजनिक रूप से घोषित किया जाने वाला मुद्दा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके गुट ने किसी विशेष विधानसभा सत्र की मांग नहीं की है, जिससे राजनीतिक कयासों को और हवा मिली है कि फिलहाल कोई बड़ा कदम जल्दबाज़ी में नहीं उठाया जाएगा। NCP के दोनों गुटों की हालिया सक्रियताओं और नरम पड़ते बयानों ने एक बार फिर इस संभावना को जन्म दिया है कि क्या पार्टी दोबारा एकजुट हो सकती है। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने औपचारिक रूप से इस दिशा में कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं ज़ोर पकड़ चुकी हैं।





