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मोदी के संबोधन के बाद AAP का सवाल: क्या व्यापार के लिए हुआ भारत के सम्मान से समझौता?

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीती रात आठ बजे राष्ट्र को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने *ऑपरेशन सिंदूर*, आतंकवाद और पाकिस्तान के मुद्दे पर सख्त रुख |

मोदी के संबोधन के बाद AAP का सवाल: क्या व्यापार के लिए हुआ भारत के सम्मान से समझौता?
फोटो: मोदी के संबोधन के बाद AAP का सवाल: क्या व्यापार के लिए हुआ भारत के सम्मान से समझौता?
बीती रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए आतंकवाद, पाकिस्तान और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। यह संबोधन उस समय आया जब भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अब भारत की नीति स्पष्ट है—देश आतंकवाद को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान से बातचीत केवल आतंकवाद और पीओके जैसे मुद्दों पर ही होगी। प्रधानमंत्री के इस भाषण के बाद देश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक वीडियो साझा किया। वीडियो में ट्रंप यह दावा करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में मदद की थी और इस प्रक्रिया में व्यापार को दबाव के रूप में इस्तेमाल किया गया था।

 वीडियो में ट्रंप यह कहते नजर आते हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान से कहा कि अगर वे युद्ध नहीं रोकेंगे तो अमेरिका उनके साथ व्यापार नहीं करेगा। अगर वे युद्ध रोकते हैं तो व्यापार जारी रहेगा। संजय सिंह ने इस वीडियो के हवाले से प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा कि क्या भारत ने व्यापार के बदले अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भारत का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का अपमान है। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री एक लीडर हैं या डीलर। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है। कई राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए हैं कि क्या भारत अपनी विदेश नीति में किसी विदेशी शक्ति के दबाव में काम कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि अगर ट्रंप के दावे सही हैं तो यह भारत की संप्रभुता पर सीधा सवाल है और इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

वहीं, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पूरी तरह राष्ट्रहित में आधारित है और वह किसी भी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं लेते। भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट कर दिया है कि भारत की नीति अब निर्णायक है और आतंकवाद के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। यह मामला अब केवल कूटनीति और रणनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद में भी गूंज सकता है और सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की जा सकती है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या प्रधानमंत्री कार्यालय या विदेश मंत्रालय इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगा या नहीं।