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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विजिलेंस जांच: केरल परिवहन परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप

केरल में राजनीतिक हलचल, जांच 2006 के परिवहन परियोजना से जुड़ी है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विजिलेंस जांच: केरल परिवहन परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप
फोटो: Vigilance Inquiry Against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar: Corruption Allegations in Kerala Transport Project

विजिलेंस जांच के आदेश का背景

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला द्वारा 4 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) की जांच के आदेश ने राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 2006 में केरल राज्य परिवहन परियोजना (KSTP) में भ्रष्टाचार किया था। यह मामला उस समय का है जब वे राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव थे।


केरल राज्य परिवहन परियोजना का विवरण

केरल में राज्य हाइवे और प्रमुख जिला सड़कों के नवीनीकरण के लिए 2002 में 1,612 करोड़ रुपए की लागत से KSTP प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी। इसमें वर्ल्ड बैंक का योगदान ₹1,224 करोड़ रुपए था। इस परियोजना के तहत पहले चरण में 254 किलोमीटर और दूसरे चरण में 327 किलोमीटर सड़कों का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण किया जाना था।


हालांकि, जमीन अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में अत्यधिक देरी के कारण परियोजना की लागत में वृद्धि हुई। दिसंबर 2006 में वर्ल्ड बैंक ने इस परियोजना की प्रगति को 'मध्यम रूप से असंतोषजनक' करार दिया। 2008 में, भारी खर्च और बजटीय घाटे के चलते राज्य सरकार को दूसरे चरण के कार्यों को परियोजना से बाहर करने का निर्णय लेना पड़ा।


मलेशियाई इंजीनियर की आत्महत्या और उसके बाद की घटनाएं

इस परियोजना के तहत इंडो-मलेशियन जॉइंट वेंचर कंपनी PATI-BEL को ठेका दिया गया था। 11 नवंबर 2006 को इस कंपनी के मेन प्रोजेक्ट मैनेजर, 58 वर्षीय मलेशियाई सिविल इंजीनियर ली सी बीन ने कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली।


गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के अनुसार, ली ने दो सुसाइड नोट छोड़े थे, जिनमें से एक में तत्कालीन PWD सचिव ज्ञानेश कुमार का नाम शामिल था। सुसाइड नोट में बकाया बिलों के निस्तारण में देरी, रिश्वतखोरी और उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और वर्तमान स्थिति

2006 में ली की आत्महत्या के बाद, वी. एस. अच्युतानंदन की LDF सरकार ने प्रारंभिक विजिलेंस जांच का आदेश दिया था और ज्ञानेश कुमार को PWD सचिव के पद से हटा दिया गया था। इसके बाद ज्ञानेश कुमार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए। कांग्रेस नेता मलयानकीझु वेणुगोपाल का आरोप है कि बाहरी दबाव के कारण जांच को बिना किसी निष्कर्ष के दबा दिया गया था।


इस मामले का पुनरुद्धार उस समय हुआ है जब ज्ञानेश कुमार वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर आलोचना का सामना कर रहे हैं। विपक्षी दलों द्वारा उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है।


राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ

केरल सरकार (कांग्रेस/UDF) की ओर से गृह मंत्री चेन्निथला ने कहा, "गंभीर शिकायत मिलने और कानूनी सलाह के बाद मैंने फाइल विजिलेंस डायरेक्टर को भेजी है। इतने गंभीर आरोपों पर सरकार मूकदर्शक नहीं रह सकती।"


सीपीएम (CPI-M) के टी. एम. थॉमस इसहाक ने जांच का स्वागत करते हुए कहा कि 2006 की केस फाइलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं, भाजपा के विधायक बी. बी. गोपाकुमार ने इस मामले को 20 साल पुराना बताते हुए कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया।


मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से इस विजिलेंस जांच के आदेश पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।