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राष्ट्रीय • दिल्ली

अमेरिका का रूसी तेल पर रुख बदला, जयशंकर ने दी प्रतिक्रिया

जयशंकर ने कहा, यह निर्णय अमेरिकी नागरिकों के हित में है।

अमेरिका का रूसी तेल पर रुख बदला, जयशंकर ने दी प्रतिक्रिया
फोटो: US Changes Stance on Russian Oil, Jaishankar Responds

अमेरिका का टैरिफ बदलने वाला निर्णय

पिछले दो हफ्तों में अमेरिका ने रूसी तेल पर अपने रुख में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जो वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। पहले भारत और चीन को 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी देने वाला अमेरिका अब रूस से तेल खरीदने की योजना बना रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस परिवर्तन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय अमेरिकी जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।


उन्होंने यह भी बताया कि अधिक प्रतिबंधों वाली दुनिया लंबे समय तक स्थायी नहीं रह सकती। ट्रंप के इस निर्णय से उनके यूरोपीय सहयोगियों में नाराजगी उत्पन्न हुई है, क्योंकि वे रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के प्रयास में लगे थे।


जयशंकर का दृष्टिकोण

एनडीटीवी वर्ल्ड फोरम में अपने बयान में जयशंकर ने ट्रंप के निर्णय की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'अमेरिका नहीं चाहता कि उसके नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़े। यह इस बात का संकेत है कि अपने हितों की रक्षा करना कितना आवश्यक है। यह हमारे दृष्टिकोण को भी पुष्ट करता है।'


भारत ने लगातार रूसी तेल की खरीद को लेकर एक स्पष्ट रुख अपनाया है, यह दर्शाते हुए कि वह अपने नागरिकों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने व्यापारिक निर्णय लिया है और सर्वोत्तम सौदों की तलाश जारी रखी है।


दुनिया की बदलती परिस्थितियाँ

विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। 'इसकी तुलना अतीत से नहीं की जा सकती। अब हर कोई कई विकल्पों पर विचार कर रहा है और कोई भी एकमात्र विकल्प पर निर्भर नहीं रहना चाहता।' उन्होंने कहा कि ऊर्जा और वित्त जैसे क्षेत्रों में अनिश्चितता है, जिससे सही निर्णय लेने की आवश्यकता है।


यूरोप और अमेरिका ने भारत के इस निर्णय की आलोचना की है, लेकिन भारत अपने फैसले पर अडिग रहा है। अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया, फिर भी भारत ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना जारी रखा है।


ट्रंप का तेल खरीदने का ऐलान

9 अक्टूबर को, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने रूस से डीजल खरीदने के लिए एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत, रूस ने वैश्विक बाजार में डीजल की बड़ी मात्रा की आपूर्ति करने पर सहमति जताई है। यह निर्णय उन यूरोपीय देशों के लिए एक बड़ा झटका है, जिन्होंने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया था।


ट्रंप ने इस फैसले को अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया और कहा, 'मैंने अमेरिका के नागरिकों के लिए यह निर्णय लिया है। हमेशा... अमेरिका प्रथम'।


ट्रंप की रणनीति में बदलाव

डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में आर्थिक प्रतिबंधों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने पहले रूस से डील करने की कोशिश की, लेकिन जब वह असफल रहे, तो उन्होंने भारत और चीन पर दबाव बनाया कि वे रूस से तेल न खरीदें। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि और चुनावी दबाव के चलते ट्रंप को रूसी तेल की खरीद की आवश्यकता महसूस हुई।


जैसे-जैसे मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे थे, ट्रंप पर बढ़ते दबाव के चलते, उन्होंने अपने फैसले में बदलाव किया। अमेरिका में डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रंप के लिए स्थिति कठिन हो गई थी।