बागी सांसदों की स्थिति स्पष्ट
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सायोनी घोष समेत 20 बागी सांसद, जो 'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल हो गए हैं, पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन सांसदों का जवाब आने के बाद ही संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बिरला ने कहा, 'संबंधित सांसदों से जवाब मांगा गया है, और जैसे ही उनके उत्तर प्राप्त होंगे, हम कार्रवाई शुरू कर देंगे। यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी है। निश्चित तौर पर दसवीं अनुसूची में एक प्रक्रिया निर्धारित है।'
प्रक्रिया में पारदर्शिता का आश्वासन
लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में पारदर्शिता से काम लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों को जवाब देने का अवसर देना प्रक्रिया का हिस्सा है, और यदि वे समय बढ़ाने का अनुरोध करते हैं, तो उन्हें समय दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया पहले से ही शुरू हो चुकी है।
बिरला ने कहा, 'प्रक्रिया तो प्रक्रिया के हिसाब से चलेगी। अदालत में भी सभी निर्णय एक दिन में नहीं होते हैं।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दल-बदल से संबंधित मामलों में अयोग्यता का निर्णय संबंधित सदन के अध्यक्ष के पास होता है, जबकि ऐसे फैसलों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
अभिषेक बनर्जी की याचिकाएं
TMC के नेता अभिषेक बनर्जी ने 20 अलग-अलग याचिकाएं लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी हैं, जिनमें बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है। उनका तर्क है कि इन सांसदों ने दूसरी पार्टी में शामिल होकर स्वेच्छा से TMC की सदस्यता छोड़ दी है, इसलिए उन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए।
बनर्जी ने अध्यक्ष से यह भी अनुरोध किया कि वे TMC के किसी अलग गुट का दावा करने वाले समूह को कोई मान्यता या सुविधा न दें। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें उन्होंने अयोग्यता की कार्यवाही पर निर्णय में देरी का मुद्दा उठाया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 23 सितंबर को यह टिप्पणी की थी कि वह उम्मीद करता है कि लोकसभा अध्यक्ष बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की याचिका पर 'जल्द' निर्णय लेंगे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिरला ने कहा, 'हम दोनों पक्षों की बात सुनेंगे। जब सदस्यों की ओर से जवाब आ जाएंगे, तो हम इस प्रक्रिया में तेजी लाएंगे।'
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत और अन्य न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि वे लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश नहीं दे सकते, लेकिन उन्हें मामले के जल्द समाधान की याद दिलाना चाहते हैं।
बागी सांसदों का तर्क
यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC की हार के बाद पार्टी के भीतर विद्रोह से जुड़ा है। 20 लोकसभा सांसदों ने NCPI में विलय की घोषणा की है और अलग दल के रूप में मान्यता देने की मांग की है। TMC का कहना है कि ये सांसद उसके चुनाव चिह्न पर चुने गए थे और किसी अन्य राजनीतिक गुट से जुड़ने का उनका निर्णय स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है।
हालांकि, बागी गुट का तर्क है कि उनका यह कदम एक वैध विलय है, जिससे उनकी स्थिति को मजबूती मिलती है।





