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उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, ओवैसी ने बीजेपी पर कसा तंज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान 'ओली दराजाली दोस्तलिक' मिलने पर असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने बाबर के संदर्भ में संघ के सदस्यों को बदलने की उम्मीद जताई।

उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, ओवैसी ने बीजेपी पर कसा तंज
फोटो: उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, ओवैसी ने बीजेपी पर कसा तंज

उज्बेकिस्तान का सम्मान

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के प्रतिष्ठित सम्मान 'ओली दराजाली दोस्तलिक' से नवाजा गया। इस अवसर पर एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने टिप्पणी की, 'मैं भाजपा को बधाई देता हूं। जिस देश से बाबर भारत आए, उसी देश ने हमारे प्रधानमंत्री को यह सम्मान दिया है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने दौरे के दौरान विभिन्न सम्मान लेकर लौटते हैं।


ओवैसी का तंज

ओवैसी ने आगे कहा, 'आप लोग बाबर के नाम पर कितनी गालियां देते थे, लेकिन अब उसी देश के लोग प्रधानमंत्री को सम्मानित कर रहे हैं। संघ को इस पर विचार करना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि अब संघ परिवार और आरएसएस समर्थक बाबर के बारे में पहले जैसी बातें नहीं करेंगे।' यह सम्मान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव द्वारा प्रदान किया गया।


भागवत के बयान पर ओवैसी की प्रतिक्रिया

ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता पर दिए गए हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भागवत का उद्देश्य आरएसएस की एक अलग छवि प्रस्तुत करना है, जबकि संगठन के कई प्रमुख विचारक मुस्लिमों को देश के लिए आंतरिक खतरा मानते हैं। भागवत ने न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड: वन ह्यूमैनिटी फेथ लीडर्स समिट’ में कहा था कि यदि कोई हिंदू चाहता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह वास्तव में हिंदू नहीं है।


हेडगेवार और गोलवलकर का संदर्भ

ओवैसी ने आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से दूरी बनाई क्योंकि महात्मा गांधी लगातार हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए प्रयासरत थे। उन्होंने आगे कहा कि हेडगेवार को 'हिंदू-मुस्लिम एकता' का नारा पसंद नहीं था। ओवैसी ने आरएसएस के पूर्व प्रमुख एमएस गोलवलकर का भी जिक्र किया, जिन्होंने कहा था कि संघ एक झंडा, एक नेता और एक विचारधारा से प्रेरित है। उन्होंने गोलवलकर की पुस्तक 'बंच ऑफ थॉट्स' में 'इंटरनल थ्रेट्स' नामक अध्याय का हवाला दिया, जिसमें मुस्लिम और ईसाई नागरिकों को क्रमशः भारत के लिए पहला और दूसरा आंतरिक खतरा बताया गया है।