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राष्ट्रीय • दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा रोड पर काम पूरा न होने पर दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा रोड पर पैदल क्रॉसिंग में सुधार में देरी पर चिंता जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा रोड पर काम पूरा न होने पर दी चेतावनी
फोटो: Supreme Court Warns Over Delay in Work on Mathura Road

सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों ने शुक्रवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अगली सुनवाई से पहले मथुरा रोड पर आवश्यक कार्य पूरा नहीं हुआ, तो वे दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ जाएंगे। यह टिप्पणी उस वक्त की गई जब कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट जंक्शन और नेशनल जूलॉजिकल पार्क के पास पैदल क्रॉसिंग में सुधार में हो रही देरी पर सुनवाई की। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया।


बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) विक्रमजीत बनर्जी से कहा कि यदि 25 नवंबर से पहले पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो उन्हें धरने पर बैठने से कोई नहीं रोक सकेगा।


प्रशासनिक देरी पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मथुरा रोड पर हर दिन हजारों वकील, बच्चे और अन्य लोग गुजरते हैं, इसलिए इस खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जस्टिस पारदीवाला ने कहा, "अगर आप अगली तारीख से पहले यह काम नहीं करते हैं, तो हम यहां धरने पर बैठेंगे और तब तक नहीं जाएंगे जब तक काम पूरा नहीं हो जाता।"


इस संदर्भ में, बनर्जी ने बताया कि उच्च स्तर पर चर्चा के बाद एक समिति इस मामले को देख रही है। हालांकि, कोर्ट ने इस प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या वास्तव में इसके लिए कोई समिति आवश्यक है।


निर्धारित समय सीमा

सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा। बेंच ने चेतावनी दी, "यह काम 25 नवंबर तक पूरा होना चाहिए।" साथ ही, बेंच ने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं होता, तो मुख्य सचिव को भी अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।


इसके पहले भी, अक्टूबर 2025 और सितंबर 2026 में कोर्ट ने मथुरा रोड पर यातायात सुधार के लिए उपायों की कमी की ओर इशारा किया था। हालांकि, हाल के आदेशों के बाद पैदल चलने वालों के लिए एक सिग्नल लगाया गया, लेकिन यह अक्सर खराब रहता है, जिसके कारण सिग्नलों को आपस में जोड़ने और रंबल स्ट्रिप्स लगाने की आवश्यकता है।


सभी की नजरें अगली सुनवाई पर

इस मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी। कोर्ट के ये टिप्पणियां भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में की गई हों, लेकिन यह उस समय आई हैं जब दिल्ली में सड़कों पर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।


जजों की यह चेतावनी दर्शाती है कि प्रशासनिक देरी पर सुप्रीम कोर्ट कितनी गंभीरता से विचार कर रहा है और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर करती है।