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कांग्रेस में नेहा बोरा की बढ़ती प्राथमिकता से NSUI में असंतोष, ग्रुप का नाम बदला

नेहा बोरा की प्राथमिकता से NSUI में असंतोष और ग्रुप का नाम बदलने का निर्णय लिया गया।

कांग्रेस में नेहा बोरा की बढ़ती प्राथमिकता से NSUI में असंतोष, ग्रुप का नाम बदला
फोटो: Rising Preference for Neha Bora in Congress Sparks Discontent in NSUI

नेहा बोरा की बढ़ती पहचान

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों में आईसा की छात्रनेता नेहा बोरा की उपस्थिति ने उन्हें खासा सुर्खियों में ला दिया है। नेहा हर प्रदर्शन में सक्रियता से भाग ले रही हैं और कांग्रेस से भी उन्हें विशेष महत्व मिल रहा है। इस स्थिति ने कांग्रेस की छात्र विंग NSUI में असंतोष पैदा कर दिया है। जब राहुल गांधी से इस विषय पर चर्चा के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला, तो एनएसयूआई के एक कार्यकर्ता ने समूह का नाम बदलकर 'We The Chhotu' रख दिया।


राहुल गांधी की चाय पर चर्चा

राहुल गांधी ने NSUI और अन्य संगठनों के युवा नेताओं को चाय पर आमंत्रित किया था, जहां नेहा बोरा का मामला भी उठाया गया था, लेकिन उस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। एनडीटीवी के सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने नेहा बोरा की शिकायत को नजरअंदाज कर दिया, जिसके बाद एनएसयूआई के नेताओं ने समूह का नाम बदलने का निर्णय लिया। उल्लेखनीय है कि 12 अक्टूबर को कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए थे।


प्रदर्शन में नेहा बोरा की प्रमुखता

कांग्रेस के इस प्रदर्शन में नेहा बोरा को अग्रणी भूमिका में रखा गया, जहां राहुल गांधी ने उन्हें और प्रियंका गांधी को सबसे आगे चलने दिया। इस दौरान राहुल थोड़े पीछे थे। इसके अतिरिक्त, बस में भी नेहा को प्राथमिकता दी गई। एनएसयूआई में इस प्रकार की उपेक्षा से असंतोष का माहौल बना। सुप्रीम कोर्ट के निकट आयोजित मार्च में भी नेहा को ट्रक पर जगह मिली, जबकि एनएसयूआई के विनोद जाखड़ वहां नहीं दिखाई दिए।


राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का असर

सूत्रों के अनुसार, एनएसयूआई के नेताओं को यह बात बर्दाश्त नहीं हो रही थी कि जब वे भी विरोध में सक्रिय थे, तब लेफ्ट की नेहा बोरा को पार्टी की अपेक्षा अधिक प्राथमिकता दी गई। कांग्रेस और लेफ्ट भले ही कुछ राज्यों में एक-दूसरे के खिलाफ हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर वे इंडिया गठबंधन में शामिल हैं। दोनों दल भाजपा का सामना करने के लिए एक साथ आ जाते हैं, जबकि विभिन्न विश्वविद्यालयों के चुनावों में भी एनएसयूआई और आईसा एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरते हैं।