दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र संघ के पदाधिकारियों और प्रशासन के बीच विवाद के बीच छात्र अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। वीडियो में छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति, उपाध्यक्ष के. गोपिका बाबू, महासचिव सुनील और अन्य छात्र प्रतिनिधियों ने प्रशासन पर संवाद से बचने और छात्र संघ को कमजोर करने के आरोप लगाए।
छात्र संघ अध्यक्ष अदिति के मुताबिक, आंदोलन की शुरुआत में 18 छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे, लेकिन तबीयत बिगड़ने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण संख्या घटकर करीब नौ रह गई। छात्रों ने बताया कि वे अपने निलंबन को रद्द करने और चीफ प्रॉक्टर ऑफिस (CPO) मैनुअल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस मैनुअल के प्रावधान कैंपस में विरोध और छात्र सक्रियता को सीमित करते हैं।
छात्रों की 13 सूत्रीय मांगों में प्रवेश परीक्षा को दोबारा लागू करना, विश्वविद्यालय को NTA से अलग करना, हॉस्टल की जर्जर इमारतों की मरम्मत, यौन उत्पीड़न के खिलाफ जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी की बहाली, इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेल को मजबूत करना, दिव्यांग छात्रों के लिए कैंपस को सुलभ बनाना और छात्रावासों में लिफ्ट की सुविधा सुधारना शामिल है। फीस वृद्धि वापस लेने और प्रशासनिक फैसलों में छात्र संघ से परामर्श करने की मांग भी उठाई गई।
छात्र प्रतिनिधियों ने दावा किया कि कुलपति से बातचीत के तीन दौर होने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को पर्याप्त समय नहीं दिया जाता, जबकि छात्र संगठनों के कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों पर अलग-अलग नियम लागू किए जाते हैं। प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर उसका पक्ष वीडियो में सामने नहीं आया।
आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे लोगों ने छात्र एकजुटता की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बातचीत और मांगों पर कार्रवाई होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
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