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सोनिया गांधी के संस्मरण पर पेंगुइन इंडिया का विवाद, प्रकाशन टला

सोनिया गांधी के संस्मरण 'बिलॉंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव' को लेकर पेंगुइन इंडिया ने कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई है, जिसके कारण भारत में इस किताब का प्रकाशन टल गया है। विवाद मुख्यतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और भाजपा से संबंधित विषयों पर केंद्रित है।

सोनिया गांधी के संस्मरण पर पेंगुइन इंडिया का विवाद, प्रकाशन टला
फोटो: सोनिया गांधी के संस्मरण पर पेंगुइन इंडिया का विवाद, प्रकाशन टला

सोनिया गांधी का संस्मरण चर्चा में

इन दिनों सोनिया गांधी का संस्मरण एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके प्रकाशक, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया, द्वारा कुछ हिस्सों पर आपत्ति के बाद इस किताब का भारत में प्रकाशन स्थगित कर दिया गया है। आपत्तियों का केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस, भाजपा और चीन से संबंधित विषय हैं।


हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, सोनिया गांधी अपने पक्ष को लेकर दृढ़ हैं। उनका कहना है कि यह उनकी व्यक्तिगत कहानी है और कोई भी यह निर्धारित नहीं कर सकता कि वे इसे किस प्रकार लिखेंगी।


पेंगुइन का विवाद और संभावित प्रकाशन

जानकारी के अनुसार, पेंगुइन की एक अन्य शाखा, अल्फ्रेड ए. नॉर्फ, 10 नवंबर को सोनिया गांधी के संस्मरण को वैश्विक स्तर पर प्रकाशित करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, हार्परकॉलिंस भी सोनिया गांधी के संस्मरण के प्रकाशन और वितरण के लिए एक समझौता करने की तैयारी में है। हालांकि, इस संबंध में प्रकाशक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


सोनिया गांधी के एक करीबी सूत्र ने बताया कि पेंगुइन इंडिया ने जिन हिस्सों पर आपत्ति जताई है, उनमें सोनिया गांधी की मोदी से मुलाकात का जिक्र और नरेंद्र मोदी की जर्सी गाय वाली टिप्पणी शामिल है। यह टिप्पणी मोदी ने 2004 में गुजरात की एक रैली में की थी।


राजनीतिक अनुभव का महत्व

सोनिया गांधी के सहयोगी का कहना है कि उनके लंबे राजनीतिक करियर के दृष्टिगत उनका संस्मरण अत्यधिक महत्वपूर्ण है। वे प्रधानमंत्री के संबंध में अपनी राय व्यक्त करने और उनसे मुलाकात के बारे में विस्तृत रूप से लिखने के लिए स्वतंत्र हैं।


सूत्रों के अनुसार, पेंगुइन इंडिया ने प्रारंभ में कई हिस्सों पर आपत्ति जताई, लेकिन जब सोनिया गांधी ने तीन-चार पैराग्राफ हटाने पर सहमति नहीं जताई, तो इस डील का विघटन हो गया। इस किताब में सोनिया गांधी ने पीएम मोदी की तुलना अन्य प्रधानमंत्रियों से भी की है, हालाँकि आरएसएस के बारे में क्या लिखा गया है, यह स्पष्ट नहीं है।