राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग में कथित धांधली और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बैरिकेड्स हटाने और अनावश्यक डिटेंशन न करने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, आरके आश्रम और पंचकुइया मार्ग के पास पुलिस और अर्धसैनिक बलों (सीआरपीएफ, एसएसबी) द्वारा प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों पर लगातार कार्रवाई जारी है।
आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नागरिकों को जबरन बसों में भरकर हिरासत में लिया गया। इस दौरान जब एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और स्वतंत्र पत्रकारों ने कवरेज करने की कोशिश की, तो पुलिस ने उनके साथ भी बदसलूकी की और उनके कैमरापर्सन को हिरासत में ले लिया। मौके पर मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और आईपीएस अधिकारियों ने मीडिया के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया और बिना किसी संवाद के कार्रवाई जारी रखी।
2 अक्टूबर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब लगातार व्यापक रूप ले रहा है, जहाँ विपक्ष, छात्र संगठन और आम नागरिक लगातार अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। प्रशासन के इस कठोर रवैये और अघोषित प्रतिबंधों के बीच देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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