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दिल्ली मार्च पर अनुपम: "यह संविधान और विरोध के अधिकार की लड़ाई है"

दिल्ली मार्च पर अनुपम का बयान, कहा- यह राइट टू प्रोटेस्ट और संविधान बचाने की लड़ाई है।

दिल्ली मार्च पर अनुपम: "यह संविधान और विरोध के अधिकार की लड़ाई है"
फोटो: Anupam Yuva Halla Bol, India Alliance Delhi March, Barakhamba Road Protest, Chief Election Commissioner, Right to Protest India

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' (INDIA Alliance) द्वारा आयोजित "चलो दिल्ली – मार्च फॉर डेमोक्रेसी" के दौरान ज़मीनी राजनीति और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। 12 खंभा रोड और कनॉट प्लेस के पास उमड़े भारी जनसैलाब के बीच 'युवा हल्ला बोल' के संयोजक अनुपम ने एक विशेष साक्षात्कार में मौजूदा राजनीतिक हालात, पुलिसिया दमन और इस आंदोलन के मूल चरित्र पर खुलकर अपनी बात रखी।

 

1. ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से शुरू हुआ आंदोलन अब 'अधिकारों की लड़ाई' बना

अनुपम ने स्पष्ट किया कि हालांकि इस विरोध प्रदर्शन की तात्कालिक शुरुआत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और एसआईआर (SIR) विवाद को लेकर हुई थी, लेकिन सरकार और तंत्र के अड़ियल रवैये ने इसका दायरा काफी व्यापक कर दिया है। उन्होंने कहा:

"हर आंदोलन की कोई विशिष्ट मांग होती है, लेकिन सत्ता के रवैये के कारण यह अब सिर्फ ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन नहीं रह गया है। यह इस देश में 'राइट टू प्रोटेस्ट' (विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार) को बहाल करने और संविधान को बचाने की निर्णायक लड़ाई बन चुका है।"

 

2. पुलिसिया दमन और प्रशासनिक सख्ती पर तीखा प्रहार

दिल्ली पुलिस और प्रशासन द्वारा की गई कड़ी बैरिकेडिंग, रातों-रात रास्ते सील करने और पत्रकारों तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की घटनाओं पर अनुपम ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह पुलिसिया दमन केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व की उस मानसिकता का परिणाम है जो हर विरोधी स्वर को कुचलना चाहती है। उन्होंने चेताया कि प्रशासन की इन तमाम कोशिशों के बावजूद युवाओं और आम जनता का हौसला डिगा नहीं है, बल्कि यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि तानाशाही के सामने जनता झुकने वाली नहीं है।

 

3. विपक्ष की एकजुटता और देश भर से पहुंचे कार्यकर्ता

इस मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, वामपंथी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से आए हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए। विपक्षी दलों ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और चुनावी शुचिता के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एक मंच पर खड़ा है।

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