नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था का हवाला देकर इंटरनेट सेवाएं ठप करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बिना शर्त माफी मांग ली है। 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक एक रात पहले जंतर-मंतर और उसके 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं अचानक बंद कर दी गई थीं, जिसके खिलाफ अदालत में याचिकाएं दायर की गई थीं।
12 साल में 926 बार इंटरनेट बैन: आंकड़े क्या कहते हैं?
इस घटना ने देश में डिजिटल अधिकारों और सूचना के प्रवाह पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश भर में 926 बार इंटरनेट सेवाएं बंद की जा चुकी हैं।
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साल 2014 में जहां केवल 6 बार इंटरनेट बैन किया गया था, वहीं यह आंकड़ा बढ़कर 2018 में 136 और आने वाले वर्षों में भी बड़े पैमाने पर दर्ज किया गया।
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राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक, 2012 से 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा 449 बार, राजस्थान में 115 बार और मणिपुर में 62 बार इंटरनेट बंद किया गया है।
सरकार हर बार कानून व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देती है, लेकिन जानकारों का मानना है कि आज के आधुनिक युग में इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है—चाहे वह दफ्तर का काम हो, कैब सेवाएं हों या फूड डिलीवरी।
प्रेस फ्रीडम और पत्रकारों की मुश्किलें
प्रदर्शनों के दौरान रिपोर्टिंग कर रहे स्वतंत्र पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नई दिल्ली जिले में 37 चेकपॉइंट्स और भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच इंटरनेट बंद होने से जमीनी सच जनता तक पहुंचाना बेहदमुश्किल हो गया था।
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की 2026 की प्रेस फ्रीडम इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, 180 देशों की सूची में भारत 157वें स्थान पर है, जो मीडिया की स्वतंत्रता पर मंडराते संकट को उजागर करता है। इसके अलावा, जंतर-मंतर को छोड़कर विरोध प्रदर्शनों के लिए सीबीडी ग्राउंड, रामलीला मैदान या बुराड़ी जैसे दूरदराज के स्थल तय करने और पुलिस की पाबंदियों ने नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि सूचना के इस दौर में बार-बार इंटरनेट बंद करना और प्रेस को रोकना "मदर ऑफ डेमोक्रेसी" की साख पर बड़ा दाग है।





