मुख्य न्यायधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी की खंडपीठ ने माना कि मुंबई के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में गिरावट का कारण कई कारक हैं, और अधिकारी इन कारणों से भली-भांति परिचित हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि अब इन समस्याओं का समाधान निकालने और उन पर तुरंत प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि जब 2023 में वायु गुणवत्ता को लेकर अदालत ने स्वत: संज्ञान लिया था, तब इसे गंभीरता से लिया गया था और अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
पीठ ने आगे कहा कि हर साल दिवाली के आसपास स्थिति जस की तस रहती है। इस दौरान शहर के वातावरण में धुंआ और प्रदूषण की समस्या और भी बढ़ जाती है। "यह सिलसिला हर साल दिवाली के बाद शुरू होता है, तो इसका समाधान क्या है?" अदालत ने सवाल किया। अदालत का मानना था कि जब तक एक ठोस और दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक स्थिति पर काबू पाना मुश्किल होगा।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि 2023 में दिवाली के दौरान एक विशेष आदेश पारित किया गया था, जिसमें पटाखे फोड़ने के लिए कुछ घंटे निर्धारित किए गए थे, लेकिन इसे पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। "हमने आदेश दिया था कि दिवाली के दौरान कुछ घंटों के लिए पटाखे फोड़े जाएं, लेकिन हमने देखा कि हमारे आदेशों के बावजूद लोग रात 1 बजे तक पटाखे फोड़ते रहे," कोर्ट ने कहा।
अदालत ने इस पर भी नाराजगी व्यक्त की कि कार्यान्वयन एजेंसियां आदेशों का पालन करने में विफल रही और प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। कोर्ट ने कहा, "जब हम आदेश देते हैं, तब कुछ कदम उठाए जाते हैं। लेकिन जब तक अधिकारियों द्वारा कठोर कदम नहीं उठाए जाते, तब तक प्रदूषण कम होने की उम्मीद नहीं है।" अदालत ने प्रदूषण को लेकर अधिकारियों को अधिक कठोर कदम उठाने की सख्त सलाह दी, ताकि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके और शहर की हवा को साफ किया जा सके।
अदालत का यह आदेश और चिंता इस बात को उजागर करता है कि वायु प्रदूषण की समस्या मुंबई जैसे महानगरों में लगातार गंभीर होती जा रही है, और इसे हल करने के लिए सख्त उपायों की आवश्यकता है।





