अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि महाकुंभ के आयोजन के लिए 22 पांटून पुलों की योजना थी, जिनमें से केवल 9 पुलों को ही यातायात के लिए तैयार किया जा सका है, जबकि बाकी 13 पुलों की स्थिति अब तक अधूरी है। उन्होंने इस पर हैरानी जताते हुए कहा, "साल भर की मेहनत के बावजूद, 22 में से केवल 9 पांटून पुल ही यातायात के लिए उपयुक्त बन पाए हैं, यानी सिर्फ 40% काम ही पूरा हो पाया है।" अखिलेश यादव ने सवाल किया कि अब महाकुंभ की शुरुआत में केवल 20 दिन बाकी हैं, ऐसे में बाकी पुल कैसे तैयार होंगे और इस बड़े आयोजन के दौरान भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाएगा, साथ ही आवागमन की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित होगी? उन्होंने भाजपा सरकार को इस गंभीर मामले पर तुरंत ध्यान देने की सलाह दी।
इसके अलावा, एक दिन पहले भी अखिलेश यादव ने महाकुंभ की अधूरी तैयारियों को लेकर एक और पोस्ट किया था। उन्होंने कहा था कि खंभों पर तार "बिछाया" नहीं, "लगाया" जाता है और वह भी समय रहते, ताकि सुरक्षा चेकअप के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उनका यह भी कहना था कि यह मुद्दा अब शासन-प्रशासन के संज्ञान में आया है, जो उनके लिए बड़ी राहत की बात है, क्योंकि यही उनका उद्देश्य था। अखिलेश ने आशा जताई कि अब कछुए की चाल की बजाय मेले की तैयारियां सही गति से आगे बढ़ेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा एक सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी और महाकुंभ की तैयारियों में कोई कमी या विफलता दिखने पर लगातार सरकार का ध्यान आकर्षित करती रहेगी।
महाकुंभ 2025 का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी तक किया जाएगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु और साधु-संत हिस्सा लेंगे। इस आयोजन की तैयारियां अभी भी चल रही हैं, और कई आवश्यक कार्यों को पूरा करने में समय कम पड़ता नजर आ रहा है। वर्तमान में, साधु-संत प्रयागराज पहुंच चुके हैं और श्रद्धालु भी आने लगे हैं। जबकि सरकार तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगी हुई है, विपक्ष ने समय रहते आवश्यक कार्यों को पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि महाकुंभ का आयोजन सफलतापूर्वक और सुचारु रूप से हो सके।





