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रिपोर्ट्स • दिल्ली

जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा, दिल्ली पुलिस ने तय किए तीन नए स्थान

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर रोक के बाद तीन नए स्थल तय। पुलिस कार्रवाई, हिरासत और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर उठे सवाल।

जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा, दिल्ली पुलिस ने तय किए तीन नए स्थान
फोटो: Jantar Mantar Protest | Delhi Police | Right to Protest | Rahul Gandhi | Gyanesh Kumar

प्रदर्शन से पहले बैरिकेडिंग, हिरासत और इंटरनेट बंद करने के आरोपों के बीच शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर बहस

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के लिए नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान बताया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब 2 अक्टूबर से दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और 10 अक्टूबर को चुनाव आयोग तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।

 

वीडियो में दावा किया गया है कि प्रदर्शन से पहले मध्य दिल्ली में करीब 37 चेकपॉइंट बनाए गए, इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। वक्ता के मुताबिक, 23 हजार से अधिक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों की तैनाती की गई। दिल्ली पुलिस के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया। वीडियो में 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और कुछ रेल सेवाओं को नियंत्रित करने की बात भी कही गई है। प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को रोकने तथा हिरासत में लेने के आरोप भी लगाए गए हैं।

 

वीडियो के अनुसार, नए प्रदर्शन स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए नगर निगम और दिल्ली पुलिस से अनुमति लेनी होगी। कुछ हिस्सों के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की मंजूरी भी जरूरी हो सकती है। वक्ता का आरोप है कि कई स्तरों की अनुमति की प्रक्रिया प्रदर्शन आयोजित करना कठिन बना सकती है।

 

जंतर-मंतर का इतिहास बताते हुए वीडियो में बोट क्लब और तत्कालीन राजपथ पर हुए प्रदर्शनों का जिक्र किया गया है। अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन, 2017 में तमिलनाडु के किसानों के प्रदर्शन, नागरिकता संशोधन कानून के विरोध और महिला पहलवानों के आंदोलन को भी इस स्थल से जुड़े प्रमुख उदाहरणों के रूप में गिनाया गया है। वक्ता का कहना है कि जंतर-मंतर की संसद और सरकारी कार्यालयों से निकटता प्रदर्शनकारियों को अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का अवसर देती है।

 

वीडियो में 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सभा करना संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

 

हालिया प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में NEET परीक्षा से जुड़ी चिंताओं और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों का उल्लेख है। विपक्षी नेता राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी शामिल बताई गई है।

 

वीडियो में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने के फैसले की आलोचना की गई है और इसे विरोध की आवाज सीमित करने वाला कदम बताया गया है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई, प्रतिबंधों और प्रशासन की मंशा से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि वीडियो में उपलब्ध नहीं कराई गई है।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर -https://youtu.be/i8M3T6Et4LE?si=KWRzcXLZp2WIu-19

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