नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और 'वोट चोरी' के गंभीर आरोपों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी थमने का नाम नहीं ले रही है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के बाद अब 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं और सांसदों ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट तक मार्च निकालने का फैसला किया। इस दौरान भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती के बीच दिल्ली की सड़कों पर जबरदस्त हंगामा देखने को मिला।
जंतर-मंतर के बाद राजघाट तक मार्च का ऐलान
पिछले कई दिनों से दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के क्रम में विपक्षी नेताओं ने रणनीति बदलते हुए राजघाट जाने का निर्णय लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित तमाम विपक्षी सांसद और 'इंडिया' गठबंधन के नेता एक रेस्टोरेंट में बैठक के बाद ढोल-नगाड़ों और बैनरों के साथ राजघाट की ओर बढ़े। नेताओं का कहना था कि यदि सरकार और प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दे रहा है, तो वे देश के राष्ट्रपिता बापू की शरण में जाकर न्याय की गुहार लगाएंगे।
पुलिस बल की भारी तैनाती और झड़पें
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्सेज और आईटीबीपी (ITBP) के लगभग 23,000 जवानों को तैनात किया गया था। मिंटो रोड और दीनदयाल उपाध्याय मार्ग जैसे प्रमुख रास्तों को छावनी में तब्दील कर दिया गया। मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें हुईं। युवा कांग्रेस और एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ अत्यधिक बर्बरता की और बल प्रयोग किया। वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना था कि बिना अनुमति के निकाले जा रहे इस मार्च को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
'वोट चोरी' और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
विपक्ष का मुख्य आरोप है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में करोड़ों वोटर्स के नाम सूची से हटा दिए गए, जिससे नागरिकों के मताधिकार पर सीधा प्रहार हुआ है। नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पूरी तरह संदेहास्पद रही है। यही कारण है कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग पर अड़ा हुआ है।
इस बीच, यूथ कांग्रेस की तरफ से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में भी कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं, यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।
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