टीआरपी-खोरों के गंदे गेम का खुलासा हो गया है. इसमें नेशनल टीवी समेत क्षेत्रीय टीवी चैनलों पर भी आरोप लगे हैं, मराठी चैनलों के दो मालिकों को गिरफ्तार भी किया गया है. रिपब्लिक टीवी के मालिक व अधिकारियों से भी महाराष्ट्र पुलिस पूछताछ कर सकती है. मुंबई पुलिस ने कहा है कि सुशांत मामले में इन चैनलों ने टीआरपी के साथ छेड़छाड़ की ताकि मामले को ज्यादा हाईवोल्टेज बनाया जा सके.
टीआरपी की इस भूख में इन चैनलों ने रिया चक्रवर्ती को डायन, काला जादूगरनी, बंगाल की जादूगरनी, सुशांत के पैसों पर पलने वाली शोख-हसीना, ड्रग माफिया का हिस्सा जैसे तमाम नामों से अपमानित किया. टीआरपी के इस नंगे नाच में टीवी चैनलों ने साबित कर दिया कि रिया ही सुशांत को मारी थीं. टीवी ने जो फैसला सुनाया उसे कुछ लोगों ने मान भी लिया. सोशल मीडिया पर जिस तरह के आक्रोश रिया के खिलाफ दिखे उससे ये बात सिद्ध हो जाती है.
फिलहाल, रिया चक्रवर्ती को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा किया जा चुका है. जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि जैसा कि एनसीबी ने रिया पर आरोप लगाया थी कि वो ड्रग माफिया का हिस्सा हैं, वो बेबुनियाद है. रिया किसी ड्रग माफिया का हिस्सा नहीं हैं. अदालत ने यह भी कहा कि रिया या सुशांत के घरों से कोई ड्रग्स बरामद नहीं किए गए हैं. इतना ही नहीं सीबीआई ने भी अपनी जांच में कहा कि सुशांत की हत्या नहीं हुई थी बल्कि उन्होंने आत्महत्या की थी.
रिया के माता- पिता जब उनसे जेल के बाहर मिले तो उनकी आंखों में सैलाब उमड़ पड़ा. उनकी मां कहती हैं कि मुझे यकीन था कि मेरी बेटी को इंसाफ मिलेगा और एक दिन बाहर आएगी, लेकिन हम इस बुरे वक्त को कभी नहीं भूल सकते.
चैनलों ने सुशांत आत्महत्या मामले में रिया को हत्यारिन घोषित कर दिया था. टीवी चैनल सुशांत को इंसाफ दिलाने से ज्यादा रिया को हत्या की दोषी सिद्ध करने में लगे थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर तमाम हैशटैग ट्रेंड करवाए, उसमें #ArrestRheaChakroborty भी शामिल है, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था.
रिया 28 दिन तक जेल में रहीं, इस दौरान उन्हें और उनके परिवार को हर दिन अपमानित किया गया. मीडिया ने टीआरपी की भूख में इस तरह से जलील किया कि समाज के कुछ लोगों में भी उनके लिए घृणा और नफरत भर गई. रिया के पड़ोसी, फूड डिलिवरी ब्बॉय, रिश्तेदार सभी से इस तरह से कूद-कूदकर सवाल पूछे जा रहे थे जैसे वे भी आरोपी हों.
देश में लोगों को दो हिस्सों में बांटा गया. कोई बिहारी गौरव की बात करने लगा तो कोई बंगाल की इज्जत की बात करने लगा. बॉलीवुड भी दो धड़े में बंट गया. इन सब से इतर नेता लोग मुद्दों की दरिद्रता में चुनावी मुद्दे बनाने लगे. खुद जज और सीबीआई बनकर इन्होंने लोगों की जज्बातों के साथ खेला और एक दूसरे को नंबर-वन घोषित करने में लग गए.
इस नंबर वन बनने की होड़ में रिया का बहुत कुछ गया. इज्जत, मान-मर्यादा सब टीआरपी-खोरों ने धूल-धुसरित किया. क्या टीवी के टीआरपी-खोर रिया से अपने किए की माफी मांगेंगे? ये मीडिया और समाज की गलतियां ही नहीं थीं ये गुनाह था. जिसके लिए इन टीआरपी-खोरों को लाइव टीवी पर माफी मांगनी चाहिए.
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