रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में जलाशयों की स्थिति पिछले साल की तुलना में और अधिक नाजुक और दयनीय हो गई है।
पिछले साल पूर्वी क्षेत्र के जलाशयों में 51 प्रतिशत पानी मौजूद था, जो उस समय की जरूरतों के लिए पर्याप्त माना जा रहा था। लेकिन इस साल यह आंकड़ा घटकर केवल 46 प्रतिशत पर आ गया है, जो एक स्पष्ट संकेत है कि जल संकट गहराता जा रहा है। इस संकट में भी बिहार की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक और भयावह बनी हुई है। यहां के जलाशयों में अब सिर्फ 19 प्रतिशत पानी शेष रह गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह स्तर 32 प्रतिशत था। सामान्य परिस्थितियों में जल की उपलब्धता 27 प्रतिशत मानी जाती है, जो एक संतुलित स्थिति को दर्शाती है। पिछले साल जलाशयों में सामान्य से अधिक पानी की मौजूदगी थी, लेकिन इस साल यह सामान्य स्तर से भी काफी नीचे चला गया है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
केंद्रीय जल आयोग की इस रिपोर्ट में पूर्वी क्षेत्र के सात राज्यों के जलाशयों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इनमें से तीन राज्यों में जलाशयों की स्थिति पिछले साल की तुलना में कुछ बेहतर हुई है, जबकि तीन अन्य राज्यों में यह और खराब हो गई है। एक राज्य की स्थिति में कोई उल्लेखनीय बदलाव देखने को नहीं मिला है। लेकिन बिहार में जलाशयों की हालत सबसे ज्यादा खराब और संकटपूर्ण बताई गई है। असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों के जलाशयों में मामूली सुधार दर्ज किया गया है, वहीं झारखंड और ओडिशा में पिछले साल की तुलना में स्थिति और बिगड़ गई है। नगालैंड के जलाशयों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह अप्रभावित रही है।
गर्मी का असामयिक आगमन
विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल बिहार में मौसम ने अप्रत्याशित रूप से समय से पहले अपनी करवट बदल ली है। गर्मी ने सामान्य से लगभग 15 दिन पहले ही जोरदार दस्तक दे दी है, जिसका असर राज्य के जल संसाधनों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
इस असामयिक गर्मी की वजह से जलाशयों पर प्रतिकूल और नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है। आमतौर पर बिहार में गर्मी की शुरुआत के साथ ही जलाशयों में पानी कम होने और सूखने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, लेकिन यह स्थिति जून के महीने में सबसे गंभीर रूप लेती है। इस बार, हालांकि, यह संकट पहले ही सिर उठाने लगा है, जो एक असामान्य और चिंताजनक परिदृश्य को सामने ला रहा है। केंद्रीय जल आयोग ने अपनी इस व्यापक रिपोर्ट में देश भर के कुल 155 जलाशयों को शामिल किया है, जिनमें से पूर्वी क्षेत्र के 25 जलाशयों की स्थिति का विशेष रूप से अध्ययन और विश्लेषण किया गया है।
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