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Bihar: 'ना झुका हूं, ना झुकूंगा', 'टाइगर अभी जिंदा है' —लालू के समर्थन में पोस्टर से गरमाई सियासत

पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के आवास के बाहर एक अनोखा पोस्टर देखने को मिला, जिस पर लिखा था ना झुका हूं, ना झुकूंगा, टाइगर |

Bihar: 'ना झुका हूं, ना झुकूंगा', 'टाइगर अभी जिंदा है' —लालू के समर्थन में पोस्टर से गरमाई सियासत
फोटो: Bihar: 'ना झुका हूं, ना झुकूंगा', 'टाइगर अभी जिंदा है' —लालू के समर्थन में पोस्टर से गरमाई सियासत
बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के आवास के बाहर एक अनोखा पोस्टर देखने को मिला, जिस पर लिखा था— "ना झुका हूं, ना झुकूंगा, टाइगर अभी जिंदा है।" यह पोस्टर न सिर्फ लालू यादव के समर्थन में लगाया गया बल्कि उनके राजनीतिक विरोधियों को सीधा संदेश देने का भी प्रतीक माना जा रहा है। 

बिहार की राजनीति में इस समय एक के बाद एक घटनाएं सामने आ रही हैं, जो आगामी चुनावी माहौल को और गरमा रही हैं। बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 'लैंड फॉर जॉब' घोटाले के मामले में लालू यादव को पूछताछ के लिए बुलाया था। इस दौरान लालू यादव अपनी बेटी मीसा भारती के साथ ईडी कार्यालय पहुंचे, जहां अधिकारियों ने उनसे घंटों पूछताछ की। इस मामले में लालू यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों पर आरोप लगे हैं, जिन्हें लेकर जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

क्या है 'लैंड फॉर जॉब' घोटाला?


यह घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 तक केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप डी की भर्तियों के दौरान लालू यादव ने घूस के रूप में उम्मीदवारों से जमीनें लीं। ईडी की चार्जशीट के अनुसार, लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों के पास सात अलग-अलग जगहों पर संदिग्ध रूप से अर्जित संपत्तियां पाई गई हैं। आरोप है कि इस घोटाले में करीब 600 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की गई। इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी केस दर्ज किया है। आरोपों के मुताबिक, लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए बिना किसी आधिकारिक विज्ञापन के रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर भर्ती की थी। इसके बदले उन्होंने उम्मीदवारों की जमीनें बेहद कम कीमत पर या बिना किसी भुगतान के अपने परिवार के सदस्यों के नाम करवा लीं।

कैसे हुई नौकरी के बदले जमीन की हेराफेरी?


सीबीआई के अनुसार, लालू यादव ने रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले 12 लोगों से सात अलग-अलग प्लॉट बेहद कम कीमत में अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर करवा लिए। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों की बाजार कीमत करीब 4 करोड़ रुपये थी, लेकिन इन्हें मात्र 26 लाख रुपये में अपने नाम करवा लिया गया। इन जमीनों को लालू की पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और अन्य परिजनों के नाम ट्रांसफर कराया गया। सीबीआई और ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि इस भर्ती घोटाले में केवल बिहार के लोगों को नौकरी दी गई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह स्पष्ट रूप से एक योजनाबद्ध घोटाला था, जिसमें लालू यादव और उनके परिवार के पांच सदस्य— राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव और खुद लालू यादव शामिल हैं।

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