फैसले से पहले ही कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।अदालत के चारों ओर पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी और आने-जाने वाले सभी व्यक्तियों की गहन तलाशी ली जा रही थी। इस दौरान अब्बास अंसारी के समर्थकों ने कोर्ट परिसर में घुसने की कोशिश की, जिससे हंगामे की स्थिति बन गई। पुलिस ने एक समर्थक को हिरासत में ले लिया।
यह मामला 3 मार्च 2022 का है, जब विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अब्बास अंसारी ने मऊ के पहाड़पुर मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने मंच से कहा था कि "सरकार बनने के बाद अधिकारियों को देख लिया जाएगा" जो एक तरह की खुली धमकी मानी गई। इस बयान के बाद सब-इंस्पेक्टर गंगाराम बिंद ने एफआईआर दर्ज करवाई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने उनके बयान को लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
अब्बास अंसारी पर आपराधिक धमकी, चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन, सरकारी कार्य में बाधा, सरकारी कर्मचारी को धमकाने, धर्म-जाति के आधार पर वैमनस्य फैलाने और षड्यंत्र रचने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। सीजेएम डॉ. के.पी. सिंह ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद आज यह फैसला सुनाया कि अभियुक्तों के खिलाफ आरोप प्रमाणित हुए हैं। अब अदालत जल्द ही उनकी सजा का एलान करेगी।





