कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने विदेशी आक्रांताओं के महिमामंडन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,
"विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन अब बंद होना चाहिए। महाराजा सुहेलदेव ने 20-25 हजार सैनिकों के साथ सालार गाजी मसूद की 1.5 लाख की फौज को हराया था। उसे जीवित पकड़ा गया और उसे इस्लाम में वर्णित जहन्नुम जैसी सजा दी गई।"
सीएम योगी ने विपक्ष पर भी करारा वार करते हुए कहा,
"जो लोग आज जिन्ना का महिमामंडन करते हैं, उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या उन्हें सरदार पटेल का सम्मान करना उचित नहीं लगता? समाजवादी पार्टी हमेशा जिन्ना को महिमामंडित करती रही है, लेकिन अब विदेशी आक्रांताओं के नाम पर कोई आयोजन नहीं होगा।" सीएम ने स्पष्ट किया कि सालार मसूद गाजी के नाम पर लगने वाले मेलों और उत्सवों को अब बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा,
"इतिहास में जिन सच्चे राष्ट्रनायकों को भुला दिया गया, अब उनका गौरव लौटाना हमारा कर्तव्य है। दशकों से लोग यह मांग कर रहे थे कि गाजी मसूद की पूजा बंद हो। मेला अब महाराजा सुहेलदेव के नाम पर ही लगेगा।"
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महाराजा सुहेलदेव को ‘राष्ट्रवीर’ की उपाधि देते हुए कहा कि उनका संघर्ष और बलिदान आज भी देश के लिए प्रेरणा है।
कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही, और योगी सरकार की ओर से इसे ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ के प्रतीक कार्यक्रम के रूप में प्रचारित किया गया।





