आजाद ने केवल पांच दिनों में एक गीत लिखा, जिसकी शुरुआत "सर ज़मीन-ए पाकिस्तान" से होती थी। यह गीत मातृभूमि को समर्पित था और उसमें देशभक्ति, एकता और सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। इस गीत को पाकिस्तान की आज़ादी के बाद रेडियो पर प्रसारित किया गया और यह कुछ समय तक आधिकारिक रूप से प्रयोग में भी रहा।
बाद के वर्षों में इस गीत को बदल दिया गया और वर्तमान में जो राष्ट्रगान पाकिस्तान में प्रचलित है, वह हाफिज जालंधरी द्वारा लिखा गया है।
हालांकि इस विषय पर इतिहास में ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन कई रिपोर्ट्स और खुद जगन्नाथ आजाद के इंटरव्यू इस बात की पुष्टि करते हैं कि उन्होंने पाकिस्तान का पहला राष्ट्रगान लिखा था। कुछ लेखों में इसका खंडन भी किया गया है, यह कहते हुए कि इसके समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
कार्यक्रम में मंत्री ने यह भी बताया कि विभाजन के दौरान आजाद को बहुत कठिन दौर से गुजरना पड़ा था। उन्होंने अपने अनुभवों में यह उल्लेख किया कि जब उनका लिखा गीत रेडियो पर प्रसारित हो रहा था, उसी समय उन्हें पाकिस्तान छोड़ने की तैयारी करनी पड़ रही थी। उनके कुछ मुस्लिम पड़ोसी उनके पास आए और उन्हें यह बताया कि हालांकि उनका गीत पूरे पाकिस्तान में बज रहा है, लेकिन देश में चल रही सांप्रदायिक हिंसा के कारण उनकी जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने आजाद से निवेदन किया कि वह सुरक्षित रूप से वहां से निकल जाएं, क्योंकि वे उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते थे।
इन परिस्थितियों में आजाद को पाकिस्तान छोड़ना पड़ा और वह भारत आ गए। भारत में उन्होंने साहित्य, पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि साहित्य और कला सीमाओं से परे जाकर एकता और मानवता का संदेश दे सकते हैं।
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