Molitics Logo
होम केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने धार्मिक ‘एकता’ पर जिन्ना को किया याद, पाकिस्तान के राष्ट्रगान से जुड़े हैं तार

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने धार्मिक ‘एकता’ पर जिन्ना को किया याद, पाकिस्तान के राष्ट्रगान से जुड़े हैं तार

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए इतिहास के एक ऐसे पहलू पर प्रकाश डाला, जो अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने धार्मिक ‘एकता’ पर जिन्ना को किया याद, पाकिस्तान के राष्ट्रगान से जुड़े हैं तार
फोटो: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने धार्मिक ‘एकता’ पर जिन्ना को किया याद, पाकिस्तान के राष्ट्रगान से जुड़े हैं तार
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए इतिहास के एक ऐसे पहलू पर प्रकाश डाला, जो अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि जब 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान को आज़ादी मिली थी, तब उसके पहले राष्ट्रगान की रचना एक हिंदू कवि, जगन्नाथ आजाद ने की थी। यह निर्णय पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का था, जिन्होंने इस नए देश में धार्मिक एकता और सहिष्णुता का संदेश देने के लिए यह कदम उठाया। जगन्नाथ आजाद का जन्म तत्कालीन ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के ईसाखेल नामक स्थान पर हुआ था। वे एक प्रसिद्ध उर्दू कवि थे और अल्लामा इकबाल की रचनाओं पर उनकी गहरी समझ थी। जिन्ना को जब राष्ट्रगान तैयार करने के लिए बनाए गए पैनल में आजाद का नाम सुझाया गया, तो उन्होंने इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा। जिन्ना का मानना था कि यदि पाकिस्तान का राष्ट्रगान एक हिंदू द्वारा लिखा जाएगा, तो यह दुनिया को एक मजबूत और समावेशी संदेश देगा।

 आजाद ने केवल पांच दिनों में एक गीत लिखा, जिसकी शुरुआत "सर ज़मीन-ए पाकिस्तान" से होती थी। यह गीत मातृभूमि को समर्पित था और उसमें देशभक्ति, एकता और सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। इस गीत को पाकिस्तान की आज़ादी के बाद रेडियो पर प्रसारित किया गया और यह कुछ समय तक आधिकारिक रूप से प्रयोग में भी रहा। बाद के वर्षों में इस गीत को बदल दिया गया और वर्तमान में जो राष्ट्रगान पाकिस्तान में प्रचलित है, वह हाफिज जालंधरी द्वारा लिखा गया है। 

हालांकि इस विषय पर इतिहास में ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन कई रिपोर्ट्स और खुद जगन्नाथ आजाद के इंटरव्यू इस बात की पुष्टि करते हैं कि उन्होंने पाकिस्तान का पहला राष्ट्रगान लिखा था। कुछ लेखों में इसका खंडन भी किया गया है, यह कहते हुए कि इसके समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। कार्यक्रम में मंत्री ने यह भी बताया कि विभाजन के दौरान आजाद को बहुत कठिन दौर से गुजरना पड़ा था। उन्होंने अपने अनुभवों में यह उल्लेख किया कि जब उनका लिखा गीत रेडियो पर प्रसारित हो रहा था, उसी समय उन्हें पाकिस्तान छोड़ने की तैयारी करनी पड़ रही थी। उनके कुछ मुस्लिम पड़ोसी उनके पास आए और उन्हें यह बताया कि हालांकि उनका गीत पूरे पाकिस्तान में बज रहा है, लेकिन देश में चल रही सांप्रदायिक हिंसा के कारण उनकी जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने आजाद से निवेदन किया कि वह सुरक्षित रूप से वहां से निकल जाएं, क्योंकि वे उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते थे। इन परिस्थितियों में आजाद को पाकिस्तान छोड़ना पड़ा और वह भारत आ गए। भारत में उन्होंने साहित्य, पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि साहित्य और कला सीमाओं से परे जाकर एकता और मानवता का संदेश दे सकते हैं।

Read This Also:- पाकिस्तान की खनिज नीति पर बवाल: बलूच और POK के नेताओं ने लगाया शोषण का आरोप