90 दिन की टैरिफ छूट और वैश्विक प्रतिक्रिया
ट्रम्प प्रशासन ने शुरुआती दौर में कई देशों को बातचीत के लिए 90 दिन की टैरिफ छूट दी थी। इस कदम के बाद 75 से अधिक देशों ने अमेरिका के साथ नए व्यापार समझौतों पर चर्चा शुरू की। हालांकि, चीन ने इस दौरान जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने निर्यात पर भी कड़े टैरिफ लगाए, जिससे उसे छूट नहीं मिल सकी।
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि, “सिर्फ चीन ने जवाबी रुख अपनाया है, अन्य देशों के साथ बातचीत के मद्देनज़र उच्च व्यक्तिगत टैरिफ को फिलहाल रोका गया है।” इस बीच, अमेरिका ने 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ बनाए रखा है, जो सभी आयात पर समान रूप से लागू होता है।
ट्रम्प ने इस नीति को "निष्पक्ष और पारस्परिक व्यापार योजना" करार देते हुए कहा कि यह कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, औद्योगिक हितों, और रोजगार सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उनका मानना है कि अमेरिका वर्षों से एकतरफा व्यापार समझौतों का शिकार रहा है, और अब समय आ गया है कि वह “खे़ल का मैदान समतल करे”।
हालांकि, इन टैरिफ नीतियों का वैश्विक वित्तीय बाजारों पर व्यापक असर देखा गया है। एशिया और यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई, और अमेरिका खुद भी इस मंदी से अछूता नहीं रहा। निवेशकों में चिंता बढ़ गई है कि बढ़ते टैरिफ से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ेगी और आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है। अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत सहित अन्य देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ का “सटीक जवाब देने” की बात दोहराई है।





