क्या ट्रंप ला रहे हैं सेंसरशिप का नया युग?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह नई नीति अमेरिका में मीडिया सेंसरशिप की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने तर्क दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप का संदेश "सही समय पर सही लोगों तक" पहुंचना चाहिए। इसी तर्क के आधार पर पारंपरिक मीडिया की जगह अब पॉडकास्टरों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को प्रेस पूल में प्राथमिकता दी जाएगी।
गौरतलब है कि प्रेस पूल में केवल 10 पत्रकारों को ही शामिल किया जाता है। पहले इनका चयन निष्पक्ष तरीके से किया जाता था, लेकिन अब यह अधिकार सीधे राष्ट्रपति और उनके शीर्ष अधिकारियों के पास होगा। इसका मतलब है कि वे तय करेंगे कि कौन से पत्रकार शामिल होंगे, और किस तरह के सवाल पूछे जाएंगे।
इस बदलाव का प्रभाव सिर्फ व्हाइट हाउस तक सीमित नहीं रहेगा। यह नई नीति ओवल ऑफिस, प्रेस ब्रीफिंग रूम, और राष्ट्रपति के विशेष विमान ‘एयर फोर्स वन’ तक फैलाई जाएगी। यानी जहां भी राष्ट्रपति ट्रंप जाएंगे, केवल उन्हीं पत्रकारों को साथ ले जाया जाएगा जो उनकी टीम की पसंद के होंगे। अब तक व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन (WHCA) प्रेस पूल के पत्रकारों का चयन करता था। यह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संगठन है जो सुनिश्चित करता था कि सभी प्रमुख मीडिया संस्थानों को प्रतिनिधित्व मिले। लेकिन इस बदलाव के साथ अब यह प्रक्रिया पूरी तरह ट्रंप प्रशासन के नियंत्रण में आ गई है।
प्रेस पूल और कई प्रमुख मीडिया संगठनों ने इस बदलाव की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है। WHCA ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह कदम लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और मीडिया की भूमिका को सीमित करने की साज़िश है।
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