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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC के विवादित फैसले पर लगाई रोक, शारीरिक शोषण को रेप के दायरे से रखा था बाहर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने उस आदेश में यह विवादित टिप्पणी की थी कि किसी लड़की के स्तनों को छूना, उसके शरीर पर हाथ फेरना या उसके पायजामे की डोरी को तोड़ने |

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC के विवादित फैसले पर लगाई रोक, शारीरिक शोषण को रेप के दायरे से रखा था बाहर
फोटो: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC के विवादित फैसले पर लगाई रोक, शारीरिक शोषण को रेप के दायरे से रखा था बाहर
भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अत्यंत विवादास्पद और चौंकाने वाले फैसले पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, जो एक बलात्कार के प्रयास से संबंधित मामले में सुनाया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने उस आदेश में यह विवादित टिप्पणी की थी कि किसी लड़की के स्तनों को छूना, उसके शरीर पर हाथ फेरना या उसके पायजामे की डोरी को तोड़ने जैसे कृत्य बलात्कार की कोशिश का आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत या आधार नहीं माने जा सकते। इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उस जज की संवेदनशीलता और समझ पर गंभीर सवाल खड़े किए गए, जिसने यह संदिग्ध और असंवेदनशील आदेश लिखा था। 

 महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन 'वी द वुमन ऑफ इंडिया' ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे बेहद आपत्तिजनक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। संगठन ने इस निर्णय को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के खिलाफ माना और इसे चुनौती देने के लिए याचिका दायर की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वत: संज्ञान लिया और इसकी सुनवाई शुरू की। सोमवार को जस्टिस बीआर गवाई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की दो सदस्यीय पीठ ने इस मुद्दे पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादित आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके।

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