सुप्रीम कोर्ट की सख्त शर्तें
पीठ ने अंसारी को निर्देश दिया कि वे बगैर पूर्व अनुमति के उत्तर प्रदेश न छोड़ें और अदालतों में पेश होने से एक दिन पहले पुलिस को सूचित करें। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि छह सप्ताह के भीतर जमानत शर्तों के अनुपालन पर एक स्थिति रिपोर्ट पेश करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंसारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले को छोड़कर अन्य सभी आपराधिक मामलों में जमानत मिल चुकी है।
इससे पहले, 18 दिसंबर 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मामले की जांच अभी भी जारी है और ऐसे में जमानत देना उचित नहीं होगा। अंसारी और उनके कुछ सहयोगियों पर गिरोह बनाकर वित्तीय एवं अन्य लाभ उठाने का आरोप लगाया गया था। अब्बास अंसारी के खिलाफ 31 अगस्त 2024 को चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में गैंगस्टर एक्ट की धारा 2 और 3 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उनके साथ नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान का भी नाम एफआईआर में शामिल था। आरोपों के अनुसार, इन पर जबरन वसूली और मारपीट करने का आरोप है।
अब्बास अंसारी मऊ निर्वाचन क्षेत्र से सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) के विधायक हैं। उन्हें इस मामले में 6 सितंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए अंसारी को जमानत नहीं दी जा सकती।
अब, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत मंजूर कर ली है, लेकिन कई सख्त शर्तें लागू की हैं।
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