अदालत में अनुशासनहीनता की घटना
मार्च में दिल्ली की एक अदालत में एक विचित्र घटना घटी, जिसने अदालत के अनुशासन और मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए। तीस हजारी कोर्ट के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश शिव कुमार की अध्यक्षता में एक मामले की सुनवाई चल रही थी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित वादी, सुशील कुमार, अचानक सुनवाई के दौरान सिगरेट पीते हुए नजर आए। न्यायाधीश ने यह देख सुशील कुमार से सवाल किया, "सुनवाई के दौरान सिगरेट पीने के लिए आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?"
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि अन्य मामलों की सुनवाई के दौरान सुशील कुमार को मोबाइल फोन पर बातचीत करते हुए देखा गया था।
अदालत ने उन्हें ऐसा न करने की चेतावनी दी थी, क्योंकि इससे अदालती कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हो रही थी। हालांकि, सुशील कुमार ने चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया और अपनी गतिविधियां जारी रखीं, जिसके परिणामस्वरूप उनका ऑडियो म्यूट कर दिया गया।
जब उनके अपने मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो अदालत ने उनके अनुचित आचरण पर सवाल उठाए। सुशील कुमार ने अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी और अदालत को यह आश्वासन दिया कि वह भविष्य में ऐसा व्यवहार नहीं करेंगे। न्यायालय ने इस मामले को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया, जो यह दर्शाता है कि कैसे अनुशासन और मर्यादा का पालन करना अदालत की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक है।





